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बड़ी खबर: कमर्शियल गैस की सप्लाई फिर से शुरू

On: March 14, 2026 9:51 PM
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एजेंसी: इजरायल अमेरिका और ईरान मिडिल ईस्ट जंग के बीच गैस की क्राइसिस के चलते कमर्शियल गैस की आपूर्ति बंद हो गई थी खबर आ रही है कि कई राज्यों में कुछ उद्योगों के लिए कमर्शियल LPG सिलेंडरों की सप्लाई फिर से शुरू कर दी गई है. इस बात की जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस ने शनिवार को दी है.
मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने बताया कि व्यापक चर्चा के बाद सरकार ने फैसला लिया है कि कमर्शियल उपभोक्ताओं को भी LPG उपलब्ध कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि कई राज्यों में कमर्शियल सिलेंडरों का वितरण (Distribution) शुरू हो चुका है और ग्राहकों को उनकी सप्लाई मिलनी भी शुरू हो गई है.

इस फैसले से खास तौर पर हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टर को काफी मदद मिल सकती है क्योंकि गैस की कमी के कारण इस क्षेत्र को हाल के दिनों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. अधिकारी ने ये भी कहा कि मौजूदा भूराजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए LPG की सप्लाई सरकार के लिए अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है. हालांकि, अब तक कहीं भी स्टॉक खत्म होने की कोई सूचना नहीं मिली है. इसी बीच कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने मध्य प्रदेश सरकार से अपील की है कि भोपाल में हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टर के पूरी तरह बंद होने से बचाने के लिए सीमित मात्रा में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की सप्लाई तुरंत बहाल की जाए.

CAIT के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि अगर ये स्थिति कुछ और दिनों तक जारी रहती है, तो भोपाल का पूरा हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टर बंद होने की कगार पर पहुंच सकता है. इससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी और आम नागरिकों की दैनिक खाद्य सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं. उन्होंने लोगों से पैनिक बुकिंग कम करने की अपील भी की. उनके अनुसार, पहले जहां रोजाना करीब 7.5-7.6 मिलियन बुकिंग हो रही थीं, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 8.8 मिलियन तक पहुंच गई हैं.

भले ही मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष सप्लाई चेन में रुकावटों को लेकर दुनिया भर में समस्या पैदा कर रहा है. लेकिन सरकारी सूत्रों ने भरोसा दिलाया है कि भारत के पास खाद का पर्याप्त भंडार है. ईरान संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले पारंपरिक सप्लाई मार्गों को बाधित कर दिया है. ये मार्ग दुनिया भर में खाद की शिपमेंट के लिए एक अहम रास्ता है. इससे यूरिया और अमोनिया जैसे फसलों के पोषक तत्वों की कीमतें बढ़ गई हैं. इससे बड़े खरीदारों के लिए आयात की लागत बढ़ गई है.

इसके जवाब में सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए आयात और घरेलू रखरखाव के कामों को पहले ही पूरा कर लिया है, क्योंकि उसे आशंका है कि जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण दुनिया भर के बाजारों में तंगी आ सकती है. 13 मार्च तक भारत के खाद का भंडार पिछले साल इसी समय की तुलना में काफी अधिक भरा हुआ है. मौजूदा भंडार की स्थिति से पता चलता है कि किसानों के पास एक आरामदायक सुरक्षा कवच मौजूद है, क्योंकि वे गर्मियों की फसल की तैयारी कर रहे हैं.

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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