बोकारो: अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से उपायुक्त बोकारो के अनुपस्थिति में AC मुमताज़ अंसारी बोकारो को सेंगेल कार्यकर्ताओं के द्वारा आदिवासी भाषाओं को बचाने, संरक्षित करने हेतु राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक तीन सूत्री मांग पत्र सौंपा गया।

इसमें राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सबसे बड़ी आदिवासी भाषा संताली को आदिवासी बहुल प्रदेश झारखंड में संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत अविलंब प्रथम राजभाषा बनाने,साथ ही झारखंड के पड़ोसी राज्य बिहार, बंगाल, असम, उड़ीसा आदि में संविधान के अनुच्छेद 347 के तहत द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिए जाने। और बाकि आदिवासी भाषा हो, मुण्डारी,कुड़ुख, खड़िया आदि भाषाओं को भी राष्ट्रीय मान्यता अर्थात आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपने वालों में सेंगेल प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू, केन्द्रीय संयोजक हराधन मार्डी, मांझी परगना मंडवा प्रदेश अध्यक्ष चन्द्र मोहन मार्डी, बोकारो जोनल परगना सह प्रदेश संयोजक करमचंद हांसदा, प्रदेश संयोजक जयराम सोरेन,सुगदा किस्कू,मांझी परगना मंडवा बोकारो जिला अध्यक्ष हरीशचंद्र मुर्मू, बोकारो जिला संयोजक संतोष सोरेन, कसमार प्रखंड अध्यक्ष बिशेश्वर मुर्मू चंदनकियारी प्रखंड अध्यक्ष राजेश मुर्मू,सेंगेल परगना भूटेल टुडू, पश्चिम महल पंचायत परगना बबलू बास्के आदि लोग मौजूद थे।
दुमका:ASA ने भी दुमका डीसी को राष्ट्रपति के नाम पत्र सौंपा
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से भारत के आदिवासी भाषाओं को बचाने, संरक्षित करने हेतु राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र सौंपा गया।

मांग पत्र की मुख्य बातें
(1) राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सबसे बड़ी आदिवासी भाषा संताली को आदिवासी बहुल प्रदेश झारखंड में प्रथम राजभाषा का दर्जा संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत अविलंब दिया जाए।

(2)साथ ही झारखंड के पड़ोसी राज्य बिहार, बंगाल, असम, उड़ीसा आदि राज्यों में भी संविधान के अनुच्छेद 347 के तहत द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया जाए।
(3)बाकि आदिवासी भाषा हो, मुण्डारी,कुड़ुख, खड़िया आदि भाषाओं को भी राष्ट्रीय मान्यता अर्थात आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
मौके पर दुमका जोनल हेड बार्नाड हांसदा, मसलिया प्रखंड अध्यक्ष मनवेल हांसदा, रानीश्वर प्रखंड उपाध्यक्ष बहादुर मुर्मू, शिवचरण टुडू, नुनूलाल हेमब्रम आदि मौजूद थे











