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Chaitra Navratri 2026: कब से शुरू हो रही चैत्र नवरात्र, जानें सही तिथि, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

On: March 12, 2026 1:29 PM
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Chaitra Navratri 2026:  हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। वासंतिक नवरात्रि की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इस वर्ष इसका शुभारंभ 19 मार्च 2026, गुरुवार से होगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में भक्त माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार माता जगत जननी डोली पर सवार होकर धरती पर आगमन करेंगी, जबकि उनकी विदाई हाथी पर होगी। इसे शुभ संकेत माना जाता है और इससे वर्ष में समृद्धि तथा सुख-शांति आने की मान्यता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार साल में कुल चार नवरात्रि होती हैं। इनमें दो गुप्त नवरात्रि, एक चैत्र नवरात्रि और एक शारदीय नवरात्रि शामिल है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी आरंभ माना जाता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भक्त इन दिनों व्रत रखते हैं और घरों में कलश स्थापना करके नियमित रूप से मां की आराधना करते हैं।

प्रतिपदा तिथि और नवरात्रि की शुरुआत

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और यह तिथि 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चूंकि व्रत और त्योहारों में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए 19 मार्च से ही चैत्र नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी। इसी दिन घटस्थापना कर पहला व्रत रखा जाएगा।

घटस्थापना के शुभ मुहूर्त

19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष शुभ समय बताए गए हैं। सुबह का मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है, लेकिन यदि किसी कारणवश उस समय पूजा न हो सके तो अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है।

पहला शुभ मुहूर्त: सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक
दूसरा शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक

अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 से 5:39 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:15 से 6:26 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:18 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:29 से 6:53 बजे तक
सायं संध्या: शाम 6:32 से 7:43 बजे तक
अमृत काल: रात 11:32 से 1:03 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 12:05 से 12:52 बजे तक

ऐसे करें कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन सबसे पहले सभी देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है। इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी भरकर उसमें ज्वारे (जौ) के बीज डाले जाते हैं और हल्का पानी छिड़का जाता है। इसके बाद गंगाजल से भरा कलश स्थापित किया जाता है और उसे मौली से बांधा जाता है। कलश में सुपारी, दूर्वा घास, अक्षत और एक सिक्का डाला जाता है। फिर कलश के ऊपर पांच आम के पत्ते रखकर उसे ढक दिया जाता है। इसके बाद एक नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर उस पर मौली बांधी जाती है और उसे कलश के ऊपर स्थापित किया जाता है। जमीन को साफ करके ज्वार वाला पात्र रखा जाता है, उसके ऊपर कलश स्थापित कर नवरात्रि पूजा की शुरुआत की जाती है। कलश को पूरे नौ दिनों तक उसी स्थान पर रखा जाता है और प्रतिदिन ज्वार में पानी दिया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है और दशमी तिथि को व्रत का पारण किया जाता है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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