चाईबासा: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन मंगलवार (27 जनवरी) को चाईबासा स्थित एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में पेश हुए। करीब 31 वर्ष पुराने एक आपराधिक मामले में अदालत ने चंपई सोरेन समेत तीन जीवित आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला वर्ष 1993 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) द्वारा आहूत झारखंड बंद के दौरान कथित विस्फोट की घटना से जुड़ा हुआ है।
अदालत ने चंपई सोरेन के अलावा श्याम नंदन टुडू उर्फ डॉक्टर टुडू और अरुण महतो के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4, 5 एवं 6 के तहत आरोप तय किए हैं। साथ ही तीनों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 201 (साक्ष्य नष्ट करने) के आरोप भी लगाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान चंपई सोरेन ने न्यायालय के समक्ष स्वयं को निर्दोष बताया और कहा कि वह मामले में ट्रायल का सामना करेंगे। कोर्ट ने तीनों आरोपितों की दलील सुनने के बाद आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी की।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद 18 सितंबर 1993 का है, जब जेएमएम ने झारखंड बंद का आह्वान किया था। पुलिस के अनुसार, बंद के दौरान आंदोलन को उग्र रूप देने के उद्देश्य से विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था। इस संबंध में गम्हरिया थाना में कांड संख्या 62/1993 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मामले से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेश साव ने बताया कि मूल प्राथमिकी में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन लंबे समय के दौरान अधिकांश आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है। मृत आरोपितों में देव चरण गोस्वामी, डॉन, सोमय मोदी, जोगेश्वर टुडू, सनातन गोराई और देवपाल गोराई शामिल हैं।
वर्तमान में इस मामले में केवल चंपई सोरेन, श्याम नंदन टुडू और अरुण महतो ही जीवित आरोपी हैं, जिनके खिलाफ अब ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
अगली सुनवाई पर पेश होंगे गवाह
आरोप तय होने के बाद एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि अगली तिथि पर अपने गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत करें, ताकि मामले में साक्ष्य की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
करीब तीन दशक पुराने इस मामले में आरोप तय होने के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें आने वाली सुनवाइयों और गवाहों के बयानों पर टिकी हुई हैं।












