Cigarette Price Hike: सिगरेट पीने वालों के लिए बुरी खबर है। केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए नए उत्पाद शुल्क (Excise Duty) के चलते रविवार से सिगरेट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वितरकों के मुताबिक 10 सिगरेट के एक पैक की कीमत में 22 से 25 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि आने वाले दिनों में यह असर और साफ दिखाई देगा।
हालांकि कंपनियों ने अभी तक नई एमआरपी (MRP) जारी नहीं की है, लेकिन बाजार में पुराने स्टॉक पर वितरक 40 प्रतिशत तक जीएसटी जोड़कर बिक्री कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
वितरकों के अनुसार 76 मिमी लंबाई वाली प्रीमियम सिगरेट की कीमत अब ब्रांड के हिसाब से 50 से 55 रुपये प्रति पैक तक पहुंच गई है। लोकप्रिय मीडियम साइज सिगरेट विल्स नेवी कट (10 स्टिक) जिसकी कीमत पहले 95 रुपये थी, अब 120 रुपये तक बिकने की संभावना है। वहीं 84 मिमी लंबाई वाली सिगरेट जैसे गोल्ड फ्लेक लाइट्स और विल्स क्लासिक, जिनकी कीमत पहले 170 रुपये प्रति पैक थी, अब बढ़कर 220 से 225 रुपये तक पहुंच सकती है।
वितरकों को उम्मीद है कि महीने के अंत तक कंपनियां नई कर व्यवस्था के अनुसार एमआरपी प्रिंट किए गए पैक बाजार में उतार देंगी। कुछ सिगरेट कंपनियों ने तब तक के लिए स्टॉक की सप्लाई रोक दी है, जब तक कि नई टैक्स स्ट्रक्चर के तहत बिलिंग शुरू नहीं हो जाती।
अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्पाद वितरक संघ (AICPDF) ने इस कर बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि कानूनी रूप से बिकने वाले तंबाकू जैसे उत्पादों पर अत्यधिक कर लगाने से पारंपरिक खुदरा कारोबार को नुकसान हो सकता है।
AICPDF के अनुसार, तंबाकू उन गिनी-चुनी श्रेणियों में शामिल है जहां छोटे किराना दुकानदार आज भी अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। लेकिन बढ़ते टैक्स और ऑनलाइन व क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से मिल रही प्रतिस्पर्धा के चलते उनकी स्थिति और कमजोर हो सकती है।
सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, साथ ही पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर (Health Cess), 1 फरवरी से लागू हो चुका है। यह कर दर 40 प्रतिशत की अधिकतम जीएसटी दर से भी ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद अब तक इन उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता था। लेकिन अब इसकी जगह अलग-अलग उपकर और उत्पाद शुल्क व्यवस्था लागू कर दी गई है।
नई कर संरचना के तहत सिगरेट की लंबाई और फिल्टर के आधार पर अलग-अलग शुल्क तय किया गया है।
• 65 मिमी तक की छोटी बिना फिल्टर सिगरेट: लगभग ₹2.05 प्रति स्टिक
• 65 मिमी तक की छोटी फिल्टर सिगरेट: लगभग ₹2.10 प्रति स्टिक
• मध्यम लंबाई (65–70 मिमी): ₹3.6 से ₹4 प्रति स्टिक
• लंबी प्रीमियम सिगरेट (70–75 मिमी): लगभग ₹5.4 प्रति स्टिक
सबसे ज्यादा ₹8.50 प्रति स्टिक का शुल्क केवल असामान्य या गैर-मानक डिज़ाइन वाली सिगरेट पर लागू होता है, जो आमतौर पर प्रचलित ब्रांड्स में शामिल नहीं हैं।
दिसंबर में संसद से मिली थी मंजूरी
संसद ने दिसंबर महीने में पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने को मंजूरी दी थी।
इससे पहले जीएसटी परिषद ने सितंबर 2025 में यह फैसला लिया था कि क्षतिपूर्ति उपकर व्यवस्था खत्म होने के बाद जीएसटी के साथ उपकर और उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा।
कोविड-19 के दौरान राज्यों को जीएसटी राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए दिए गए 2.69 लाख करोड़ रुपये के ऋण की चुकौती की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 तय की गई थी। इसके बाद ही नई कर व्यवस्था को लागू किया गया।













