---Advertisement---

सरकारी गाइडलाइंस के अनुरूप स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन सुनिश्चित करें : डीसी

On: December 4, 2025 10:02 PM
---Advertisement---

गढ़वा: नगर भवन में गुरुवार (4 दिसंबर 2025) को उपायुक्त दिनेश यादव की अध्यक्षता में PC&PNDT Act, 1994 एवं The Clinical Establishment (Registration and Regulation) Act, 2010 तथा झारखंड राज्य क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट नियमावली 2013 के तहत एक दिवसीय कार्यशाला-सह-समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाना तथा स्वास्थ्य केंद्रों में न्यूनतम मानकों को सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी रंका रुद्र प्रताप, सिविल सर्जन जे. एफ. कैनेडी सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।


कार्यशाला में जिलेभर के मेडिकल प्रैक्टिशनर, निजी अस्पताल संचालक, क्लिनिक प्रतिनिधि, कथित झोलाछाप चिकित्सक (Quacks), सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रतिभागियों को पीसीपीएनडीटी एक्ट और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से जुड़े प्रावधानों, अर्हताओं, सीमाओं एवं अनिवार्य मानकों के अनुपालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।


उपायुक्त दिनेश यादव ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार आवश्यक है। कोई भी चिकित्सालय अथवा स्वास्थ्य केंद्र तभी वैध माना जाएगा, जब उसका संचालन क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 एवं नियम 2013 के अनुसार किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य केंद्रों में केवल मान्यता प्राप्त एवं योग्य चिकित्सक तथा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी ही सेवा दे सकते हैं। प्रत्येक संस्थान में चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मियों का विवरण, हेल्पलाइन नंबर, ड्यूटी चार्ट और क्लिनिक अथॉरिटी सर्टिफिकेट प्रदर्शित होना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण या नियमों के उल्लंघन पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उपायुक्त ने जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को मानक अनुसार संचालन सुनिश्चित करने तथा जिनका लाइसेंस समाप्त हो चुका है, उन्हें तत्काल रिन्यूअल हेतु आवेदन करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अल्ट्रासाउंड केंद्र के अंदर-बाहर डॉक्टर का नाम, मोबाइल नंबर और फोटो अनिवार्य रूप से प्रदर्शित हों। ‘यहां लिंग परीक्षण नहीं होता है’ का बोर्ड स्पष्ट रूप से लगाया जाए।
नियमों के उल्लंघन पर दो नोटिस के बाद केंद्रों को सील कर दिया जाएगा।

उन्होंने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि अवैध रूप से संचालित हेल्थ सेंटरों एवं अयोग्य चिकित्सकों की जांच हेतु इंस्पेक्शन फॉर्मेट तैयार कर जांच टीमों को उपलब्ध कराया जाए।

सिविल सर्जन जे. एफ. कैनेडी ने भी क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और पीसीपीएनडीटी एक्ट के उद्देश्य, न्यूनतम मानकों, दायित्वों एवं दंड प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रैक्टिशनर संसाधनों की कमी के कारण अनजाने में गलतियां कर बैठते हैं, इसलिए यह कार्यशाला उन्हें सही जानकारी प्रदान करने का प्रयास है।

कार्यक्रम के अंत में सरकारी व निजी चिकित्सकों, प्रैक्टिशनरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा अन्य उपस्थित प्रतिभागियों ने अपनी समस्याएं और सुझाव साझा किए। उपायुक्त ने सभी से सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ मरीजों की सेवा करने तथा सरकारी नियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने की अपील की।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

Join WhatsApp

Join Now