रांची/दिल्ली: झारखंड की सियासत इन दिनों अंदरूनी खींचतान के दौर से गुजर रही है। सत्ताधारी महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, खासकर कांग्रेस के भीतर हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। पार्टी के ही पांच विधायकों का अचानक रांची छोड़कर दिल्ली पहुंचना और आलाकमान के सामने अपनी बात रखना, इस बात का साफ संकेत है कि कांग्रेस के अंदर असंतोष गहराता जा रहा है।
कांग्रेस के ये विधायक हाल ही में दिल्ली में डेरा डाले हुए थे, जहां उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर राज्य सरकार और खासतौर पर कांग्रेस कोटे से बने मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जाहिर की। अब ये सभी विधायक वापस रांची लौट आए हैं, लेकिन उनके सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं।
मंत्रियों की कार्यशैली से असंतुष्ट विधायक
दिल्ली जाकर अपनी बात रखने वाले विधायकों में राजेश कच्छप, कांके से सुरेश बैठा, कोलेबिरा से नमन विक्सल कोंगाड़ी, जगन्नाथपुर से सोनेराम सिंकू और सिमडेगा से भूषण बाड़ा शामिल हैं। इन सभी का आरोप है कि हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे से बने मंत्री न तो विधायकों की समस्याओं को गंभीरता से सुन रहे हैं और न ही पार्टी कार्यकर्ताओं की बातों पर ध्यान दे रहे हैं।
विधायकों का कहना है कि जब अपने ही दल के जनप्रतिनिधियों की अनदेखी हो रही है, तो आम कार्यकर्ताओं और जनता की समस्याओं की सुनवाई कैसे हो पाएगी। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने सामूहिक रूप से दिल्ली जाकर पार्टी आलाकमान को स्थिति से अवगत कराया।
आलाकमान से हुई मुलाकात
कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने बताया कि उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता के. राजू से मुलाकात की। इस दौरान झारखंड में कांग्रेस की स्थिति और मंत्रियों की कार्यशैली पर खुलकर चर्चा की गई।
राजेश कच्छप के अनुसार, यह कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले भी तीन बार राज्य की स्थिति से केंद्रीय नेतृत्व को अवगत कराया जा चुका है। बार-बार वही हालात पैदा हो रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं और विधायकों में निराशा बढ़ रही है।
‘व्यक्तिगत नहीं, संगठनात्मक चिंता’
हालांकि, विधायक यह भी साफ कर रहे हैं कि उनकी नाराजगी व्यक्तिगत नहीं है। उनका दावा है कि वे अपनी बात रखने नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं को नेतृत्व तक पहुंचाने गए थे। उनका कहना है कि कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को केवल सत्ता नहीं, बल्कि संगठन और जमीन से जुड़े लोगों की भी चिंता करनी चाहिए।
कांग्रेस में बढ़ता तनाव
गौरतलब है कि झारखंड की महागठबंधन सरकार में कांग्रेस के चार मंत्री हैं। लेकिन पार्टी के भीतर जिस तरह से असंतोष खुलकर सामने आ रहा है, उसने सरकार की कार्यशैली और आपसी समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर हमलावर है और इसे सरकार की अंदरूनी कमजोरी बता रहा है।
अब फैसला आलाकमान के पाले में
अब सबकी नजरें कांग्रेस आलाकमान पर टिकी हैं कि वह इस बढ़ते असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है। क्या मंत्रियों की कार्यशैली में बदलाव होगा, या संगठनात्मक स्तर पर कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि झारखंड कांग्रेस के भीतर ‘ऑल इज नॉट वेल’ की स्थिति अब छुपी नहीं रही।












