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जमशेदपुर: परसुडीह व बागबेड़ा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में तीन दिन से बिजली व्यवस्था ध्वस्त,जनता त्रस्त,अस्सिटेंट इंजीनियर बोले!

On: April 4, 2026 2:47 PM
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जमशेदपुर: परसुडीह व बागबेड़ा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में तीन दिन से बिजली व्यवस्था ध्वस्त है। जिसके कारण लोग इस उमस भरी गर्मी में परेशान है। लोगों में यह भय व्याप्त है कि अभी तो गर्मी की शुरुआत हुई है और पावर कट शुरू है जब भीषण गर्मी पड़ेगी तो क्या हाल होगा!

परसुडीह और बागबेड़ा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से घंटो बिजली गुल रही रही है। खास करके दोपहर के समय में बिजली व्यवस्था चरमरा जा रही है। इसके अलावा यदि हल्की-फुल्की आंधी बारिश भी आने पर घंटे बिजली संध्या के समय गुल हो जा रही है। जिससे बिजली विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं और यदि यही हाल रहा और भीषण गर्मी आ गई तो केवल बिजली बिल बढ़ाने वाली झारखंड सरकार के प्रति लोगों में आक्रोश पनपना तय है।

गुरुवार 2 अप्रैल शुक्रवार 3 अप्रैल को घंटों बिजली गुल रही।और शनिवार 4 अप्रैल को भी तकरीबन 12:00 बजे के आसपास से बिजली गुल है और न जाने कब आएगा। लगभग 3 घंटे होने जा रहे हैं।

बता दें कि पिछले गर्मी में भी ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। इसके बाद राजनीतिक दलों और संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई थी। फिर से वही स्थिति नजर आ रही है।

वैसे भी चर्चा है कि पिछले वर्षों में लगातार बिजली व्यवस्था ध्वस्त रहने के कारण उद्योग धंधों पर इसका पूरा प्रभाव पड़ रहा है। कई छोटी-मोटी कंपनियों बंद हो चुकी है कई बंद होने के कगार पर है। आटा चक्की, मसाला पिसाई और भी अन्य बिजली से चलने वाले उपकरणों वाले धंधे में पावर नहीं रहने के कारण काम नहीं होने पर मलिक मजदूरों को पेमेंट नहीं देना चाहते हैं जिसके कारण मजदूर काम करने भी नहीं आ रहे हैं और यह सब धंधे बंद हो रहे हैं।

इधर इस संदर्भ में जब करनडीह बिजली विभाग के सहायक अभियंता देवाशीष पत्रा से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि ग्रिड से ही गड़बड़ी है जिसके कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित है।

बहरहाल स्थिति में झारखंड की बिजली व्यवस्था सुधार होती है या गर्मी में लोगों को झेलना पड़ेगा यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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