गढ़वा: भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी रितेश चौबे ने झामुमो सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य में बालू संकट ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार ने बालू टेंडर प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बनाकर बालू माफियाओं को संरक्षण दिया है, जिसके कारण गरीबों और आम नागरिकों के निर्माण कार्य ठप पड़े हैं।
उन्होंने कहा कि बालू की कमी के कारण लोग मजबूरी में बिहार तथा अन्य राज्यों से महंगे दामों पर बालू मंगाने को विवश हैं। कुछ समय पहले सरकार की ओर से बालू टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई थी, लेकिन निर्धारित ऊंची दरों के कारण कोई भी ठेकेदार आगे नहीं आया। चौबे ने कहा कि जब सामान्य ठेकेदार टेंडर शुल्क वहन ही नहीं कर पाएंगे, तो स्वाभाविक रूप से केवल बालू माफिया ही इसमें शामिल होंगे, जिससे भ्रष्टाचार और अनियमितता बढ़ेगी।
उन्होंने हेमंत सरकार को “निरंकुश और माफिया–पोषक” बताते हुए कहा कि आम जनता बालू के लिए परेशान है, लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बालू संचालन का अधिकार पंचायतों को देने की घोषणा तो की, परंतु किसी भी पंचायत प्रतिनिधि को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
चौबे ने कहा कि झारखंड के इतिहास में हेमंत सरकार सबसे भ्रष्ट और लापरवाह साबित हुई है। उन्होंने दावा किया कि 2013 से पहले भाजपा सरकार के दौरान बालू जनता को निःशुल्क मिलता था, लेकिन हेमंत सरकार के आने के बाद से बालू को कारोबार बनाकर जनता का शोषण किया जा रहा है।
अंत में चौबे ने कहा कि खनिज संपदाओं से सम्पन्न राज्य होने के बावजूद यदि झामुमो सरकार जनता को बालू जैसी मूल आवश्यकता भी उपलब्ध नहीं करा सकती, तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
बालू टेंडर में माफियाओं की एंट्री! भाजपा ने हेमंत सरकार को बताया ‘माफिया पोषक’














