नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर शहर से मानवता को झकझोर देने वाला एक बेहद अमानवीय मामला सामने आया है। यहां एक 12 वर्षीय मासूम बच्चे के साथ उसके ही माता-पिता द्वारा क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। बच्चे को रोजाना घर की छत पर लोहे की सरियों से जंजीर में बांधकर छोड़ दिया जाता था, ताकि वह कहीं जा न सके।
यह सनसनीखेज मामला नागपुर के अजनी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, बच्चे के माता-पिता मजदूरी का काम करते हैं और काम पर जाने से पहले वे बच्चे को छत पर जंजीर से बांधकर चले जाते थे। बच्चे को एक बाल्टी पर खड़ा कर दिया जाता था, जिससे वह बैठ या हिल भी न सके।
माता-पिता का कहना था कि उनका बेटा उनकी बात नहीं मानता और कथित रूप से गलत व्यवहार करता है। इसी वजह से उन्होंने उसे काबू में रखने के नाम पर यह अमानवीय तरीका अपनाया। रोजाना घंटों तक बच्चे को धूप-गर्मी में जंजीर से बांधकर रखा जाता था, जिससे उसके हाथों पर गहरे निशान तक पड़ गए।
सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन
घटना की जानकारी मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन और महिला एवं बाल विकास विभाग की बाल संरक्षण इकाई (DCPU) सक्रिय हुई। महिला एवं बाल कल्याण विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची। जब टीम छत पर पहुंची तो बच्चा लोहे की सरियों में जंजीर से बंधा हुआ मिला।
पुलिस ने कराया सुरक्षित रेस्क्यू
पुलिस की मदद से बच्चे को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया। बच्चे की दयनीय हालत देखकर अधिकारियों ने तुरंत उसे संरक्षण में ले लिया। फिलहाल बच्चे को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और उसकी काउंसलिंग की जा रही है।
माता-पिता पर दर्ज हुआ मामला
बाल संरक्षण टीम की शिकायत के आधार पर अजनी पुलिस थाना में बच्चे के माता-पिता के खिलाफ बाल न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि बच्चे के साथ पहले भी इस तरह की क्रूरता की जाती थी या नहीं।
बाल संरक्षण विभाग जुटा पुनर्वास में
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम बच्चे की मानसिक स्थिति को देखते हुए काउंसलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
यह घटना एक बार फिर समाज के सामने यह सवाल खड़ा करती है कि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर जागरूकता अब भी क्यों नाकाफी है।














