दर्जन भर से अधिक स्लीपर सेल जमशेदपुर में मौजूद, आतंकी हमले की फिराक में
जमशेदपुर: इंटरपोल झारखंड के जमशेदपुर में आतंकी हमले की आशंका जताते हुए झारखंड सरकार को खुफिया रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकियों की जमशेदपुर में दर्जन भर से अधिक स्लीपर सेल मौजूद है। इस खबर के बाद जिला पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रदेश सरकार हाई लेवल बैठक करने की तैयारी में जुट गया है।
सूत्रों के मुताबिक स्लीपर सेल के लोग पाकिस्तान के संपर्क में हैं. कई आतंकियों ने पाकिस्तान में प्रशिक्षण भी लिया है। .
आईबी और इंटेलिजेंस विभाग को भी लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं. आपको बता दें कि जमशेदपुर में टाटा स्टील और टाटा मोटर्स जैसे देश के प्रमुख उद्योग हैं. जमशेदपुर की उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बिहार से सीधी कनेक्टिविटी भी है.
खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जमशेदपुर में बड़ी संख्या में स्लीपर सेल सक्रिय हैं, जिनका सीधा या परोक्ष संबंध पाकिस्तान से है. बताया गया है कि इनमें से कई लोग पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण भी ले चुके हैं. इस गंभीर इनपुट के बाद राज्य सरकार स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक की तैयारी की जा रही है, जिसमें आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा.
रिपोर्ट के अनुसार, आजाद नगर के जाकिरनगर रोड नंबर-14 निवासी सैयद मोहम्मद अर्शियान इस नेटवर्क को लीड कर रहा है. आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के बाद से अर्शियान पिछले सात-आठ वर्षों से फरार है. एनआईए और एटीएस की टीमें कई बार जमशेदपुर में उसकी तलाश करने पहुंची हैं.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने अलकायदा से जुड़े आतंकी अब्दुल शमी को 18 जनवरी 2016 को हरियाणा के मेवात से गिरफ्तार किया था. खुफिया एजेंसियां पहले सें उस पर नजर रखे हुए थी, क्योंकि वह ओडिशा के कटक से 15 दिसंबर 2015 को गिरफ्तार किए गए आतंकी अब्दुल रहमान उर्फ कटकी के संपर्क में था. पृछताछ में सामनेआया था कि कटकी को ओडिशा और झारखंड में अलकायदा के लिए नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इसी कड़ी में अब्दुल शमी जनवरी 2014 में दुबई के रास्ते पाकिस्तान गया था. वहीं से उसने हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया. जनवरी 2015 में भारत लौटने के बाद वह कटकी के संपर्क में रहा. 13 जनवरी 2016 को वह जमात में जाने की बात कहकर घर से निकला था और पांच दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया.
आतंकियों के निशाने पर क्यों है जमशेदपुर
टाटा स्टील और टाटा मोटर्स जैसी देश की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी के कारण जमशेदपुर राष्ट्रीय स्तर पर एक आम औद्योगिक केंद्र है. ऐसे प्रतिष्ठान आतंकी संगठनों के लिए हाई इंपैक्ट टारगेट माने जाते हैं. टाटानगर रेलवे स्टेशन के साथ राष्ट्रीय और राज्य मार्गों का मजबूत नेटवर्क शहर को लॉजिस्टिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनता है, जो किसी भी साजिश की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है. जमशेदपुर की उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बिहार से सीधी कनेक्टिविटी है. इससे यह इलाका आवाजाही के लिए आसान और संदिग्धों के मूवमेंट को छिपाने में सहायक होता है. बीते वर्षों में अलकायदा और सिमी जैसे संगठनों से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी और छापेमारी की घटनाएं सामने आ चुकी है. इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी जमशेदपुर पर हुई है.
खुफिया एजेंसियों ने जमशेदपुर पुलिस को जमशेदपुर में स्लीपर सेल की सूचना दे दी है. इसके बाद जमशेदपुर पुलिस अलर्ट मोर्ड पर है. जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि पूर्व में भी जमशेदपुर में इस तरह की गतिविधियां देखी गई हैं. शहर से कई ऐसे लोग पकड़े गए हैं जो अंतर्राष्ट्रीय अपराधी थे. उन्होंने कहा कि खुफिया एजेंसियों ने इस तरह की रिपोर्ट दी है कि जमशेदपुर में एक दर्जन से अधिक स्लीपर सेल काम कर रहे हैं तो यह चिंता का विषय है. जिला प्रशासन को अपनी खुफिया टीम को सक्रिय कर उन अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना चाहिए.
जमशेदपुर कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि जमशेदपुर में पूर्व में भी अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठन से जुड़े संदिग्ध पकड़े गए हैं. ऐसे में जब खुफिया एजेंसियां इस तरह की रिपोर्ट अगर सौंपती हैं तो जिला पुलिस को अलर्ट रहने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि जमशेदपुर में बड़े-बड़े उद्योग घराने हैं. यंहा बड़ा रेलवे स्टेशन है. अगर इस तरह की रिपोर्ट खुफिया एजेंसियां दे रही हैं तो जमशेदपुर पुलिस को सतर्क रहना होगा और अपना खुफिया तंत्र मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि आतंकवादी शहर में किसी प्रकार की आतंकवादी घटना को अंजाम नहीं देख सकें.











