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डिजिटल जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल से, अधिसूचना जारी

On: January 8, 2026 9:06 AM
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 को लेकर बड़ी घोषणा करते हुए इसके पहले चरण की समयसीमा औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, जनगणना का पहला चरण घर और आवास सूचीकरण (हाउसलिस्टिंग ऑपरेशंस) से जुड़ा होगा, जिसे 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा। इस अवधि के भीतर प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने स्तर पर निर्धारित 30 दिनों के समय में यह कार्य संपन्न करेंगे।

इस बार जनगणना में एक महत्वपूर्ण नया प्रावधान जोड़ा गया है। अधिसूचना के मुताबिक, स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा। घर-घर जाकर सूचीकरण की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले नागरिकों को यह सुविधा दी जाएगी, जिसके तहत वे मोबाइल ऐप या पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिकों के लिए सुविधाजनक होगी।

गौरतलब है कि यह जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुई 2021 की जनगणना के बाद कराई जा रही है। पूरी जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में घरों की सूचीकरण और आवास की स्थिति से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाएगा, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की आधी रात निर्धारित की गई है। हालांकि, हिमाच्छादित और दुर्गम क्षेत्रों के लिए यह तिथि सितंबर 2026 रखी गई है।

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जो इसे ऐतिहासिक बनाती है। डेटा संग्रह के लिए एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर आधारित मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (Census Management and Monitoring System – CMMS) पोर्टल के माध्यम से पूरे अभियान की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। अनुमान है कि लगभग 30 लाख जमीनी स्तर के कर्मचारी, जिनमें बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षक शामिल होंगे, इस महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेंगे।

पिछले वर्ष केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के आयोजन के लिए लगभग 11,718 करोड़ रुपये की लागत को मंजूरी दी थी। इस जनगणना की एक और अहम विशेषता यह होगी कि जनसंख्या गणना चरण में जाति से संबंधित जानकारी भी शामिल की जाएगी। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार होगा, जब जनगणना के दौरान इस तरह का विस्तृत जातिगत डेटा एकत्र किया जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का प्रसार उपयोगकर्ता-अनुकूल तरीके से किया जाएगा। Census as a Service (CaaS) मॉडल के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को मशीन-पठनीय डेटा उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नीति निर्माण, योजना निर्माण और विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

केंद्र सरकार के अनुसार, जनगणना 2027 विश्व का अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास होगा। इससे देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति की सटीक तस्वीर सामने आएगी, जो आने वाले वर्षों में नीति-निर्माण और विकास योजनाओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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