नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति तीन वर्षों के लिए की गई है।
उर्जित पटेल का नाम भारतीय और वैश्विक वित्तीय जगत में एक सशक्त आर्थिक विशेषज्ञ के तौर पर लिया जाता है। उन्होंने सितंबर 2016 से दिसंबर 2018 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति नियंत्रण, मौद्रिक स्थिरता और बैंकों की वित्तीय स्थिति सुधारने जैसे अहम कदमों के लिए जाना जाता है।
RBI गवर्नर रहते हुए उन्होंने मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) को और अधिक प्रभावी बनाया और भारतीय मौद्रिक नीति में पारदर्शिता व अनुशासन को बढ़ावा दिया। साथ ही, बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती और एनपीए (Non-Performing Assets) की चुनौती से निपटने की दिशा में भी महत्वपूर्ण फैसले लिए।
यह पहली बार नहीं है जब उर्जित पटेल का IMF से जुड़े हैं। साल 1996-97 में वे IMF से डिप्यूटेशन पर RBI में आए थे और उस दौरान उन्होंने डेब्ट मार्केट, बैंकिंग सेक्टर रिफॉर्म, पेंशन फंड रिफॉर्म्स और फॉरेन एक्सचेंज मार्केट पर सलाह दी थी। इसके बाद 1998 से 2001 तक वे वित्त मंत्रालय में कंसल्टेंट रहे। IMF में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनने के बाद उर्जित पटेल को अब वैश्विक स्तर पर आर्थिक नीतियों, वित्तीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर काम करने का अवसर मिलेगा। माना जा रहा है कि उनका अनुभव विकासशील देशों, खासकर भारत जैसे उभरते बाजारों की चुनौतियों को सामने रखने और उनके समाधान सुझाने में बेहद मददगार साबित होगा।
उर्जित पटेल की इस नियुक्ति को भारत के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
RBI के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल बने IMF के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, 3 साल तक संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी

