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गढ़वा सदर अस्पताल में दलाली का खेल उजागर, मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने के बदले वसूले जा रहे थे हजारों रुपए; SDM की जांच में खुलासा

On: March 20, 2026 6:17 PM
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गढ़वा: गढ़वा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों को बेहतर इलाज के नाम पर डराकर निजी क्लिनिक भेजने और इसके बदले मोटा कमीशन लेने का खेल उजागर हुआ है। प्रशासनिक जांच में इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें अस्पताल के ही सरकारी कर्मचारी शामिल पाए गए हैं।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा

जिला प्रशासन के निर्देश पर एसडीएम द्वारा की गई जांच में सामने आया कि सदर अस्पताल में कुछ कर्मी मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह कर निजी क्लिनिक में इलाज कराने के लिए मजबूर करते हैं। इसके एवज में प्रति मरीज 5 से 10 हजार रुपए तक का कमीशन लिया जाता है।

गर्भवती महिला की मौत से खुला मामला

यह मामला तब उजागर हुआ जब खरौंधी थाना क्षेत्र के चौरिया गांव की रहने वाली गर्भवती पुष्पा देवी को प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कर्मियों ने परिजनों को डरा-धमकाकर महिला को एक निजी क्लिनिक में भेज दिया, जहां प्रसव के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया, जिसके बाद डीसी के निर्देश पर जांच कराई गई।

फोनपे से हुआ कमीशन का लेन-देन

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मरीज को निजी क्लिनिक भेजने के बदले ओटी सहायक और एएनएम को 5-5 हजार रुपए का कमीशन दिया गया था। यह रकम डिजिटल माध्यम (फोनपे) से ट्रांसफर की गई थी, जिसका उल्लेख रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से किया गया है।

कर्मचारी ही निकले बिचौलिया

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे मामले में कोई बाहरी दलाल नहीं, बल्कि अस्पताल के ही सरकारी कर्मचारी बिचौलिया बने हुए थे। ये कर्मचारी मरीजों को झूठा डर दिखाकर निजी अस्पतालों में रेफर करते थे।

कार्रवाई शुरू

मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
ओटी सहायक राम प्रवेश, जो आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्त था, उसके खिलाफ निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वहीं, एएनएम नैन कुमारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है और आगे विभागीय कार्रवाई की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों कर्मियों ने कमीशन लेने की बात स्वीकार कर ली है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने गढ़वा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अस्पताल, जहां मरीजों को मुफ्त और बेहतर इलाज मिलना चाहिए, वहीं उन्हें निजी क्लिनिकों के चंगुल में धकेला जा रहा है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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