झारखंड वार्ता संवाददाता
गढ़वा: सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार की पहल के तहत मंगलवार को टाउन हॉल, गढ़वा में जिला स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक कुरीति निवारण योजना, बाल विवाह मुक्त झारखंड, मिशन शक्ति तथा राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी दिनेश यादव, जिला परिषद उपाध्यक्ष सत्यनारायण यादव, अपर समाहर्ता राज महेश्वरम, अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश, गढ़वा बीडीओ कुमार नरेंद्र नारायण, सीओ शफी आलम एवं सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा पंकज कुमार गिरि द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। अतिथियों का स्वागत महिला पर्यवेक्षिकाओं ने पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर किया।

कार्यक्रम में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी धीरज प्रकाश ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाल विवाह उन्मूलन को लेकर जिले में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष एवं बालकों की 21 वर्ष निर्धारित है, इससे कम उम्र में विवाह कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में 12 एवं 2025 में अब तक 17 बाल विवाह रोके गए हैं। किसी भी संदिग्ध स्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 एवं पुलिस हेल्पलाइन 112 पर सूचना देने की अपील की गई।
मुख्य अतिथि उपायुक्त दिनेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह और डायन कुप्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का एकमात्र प्रभावी उपाय शिक्षा है। उन्होंने कहा कि डायन प्रथा के अधिकांश मामले असहाय, दलित, पिछड़े और विधवा परिवारों से जुड़े होते हैं। ऐसे अंधविश्वासों से समाज को बाहर निकालने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उपायुक्त ने कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, मुखिया, आंगनबाड़ी सेविकाएं और समाज के अन्य प्रतिनिधि एकजुट होकर काम करें, तो इन कुरीतियों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने बाल विवाह या डायन कुप्रथा की सूचना तत्काल प्रशासन या निकटतम थाना को देने की अपील की।
अपर समाहर्ता राज महेश्वरम ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने पंचायत, विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और सार्वजनिक स्थलों पर कानूनों एवं दंड प्रावधानों की जानकारी के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।
जिला परिषद उपाध्यक्ष सत्यनारायण यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। उन्होंने विद्यालय और पंचायत स्तर पर नियमित बैठकों के माध्यम से अभिभावकों को जागरूक करने की आवश्यकता बताई।
सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा पंकज कुमार गिरि ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास को प्रभावित करता है। इससे किशोरियों में मातृ मृत्यु, कुपोषण, एनीमिया और शिक्षा से वंचित होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने समाज की सक्रिय भागीदारी को इन कुरीतियों के उन्मूलन के लिए आवश्यक बताया।
कार्यशाला में मिशन शक्ति के अंतर्गत संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना, सामूहिक विवाह एवं सामूहिक अंतिम संस्कार योजना सहित अन्य योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 और घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या एवं नशा मुक्ति जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला के दौरान यूनिसेफ के रिसोर्स पर्सन द्वारा पीपीटी के माध्यम से बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा के दुष्परिणामों पर जानकारी दी गई। अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह एवं डायन कुप्रथा के विरुद्ध शपथ भी दिलाई गई।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में मुखिया, आंगनबाड़ी सेविकाएं, स्वयंसेवी संगठन, जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।














