गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर पड़े हरीश राणा को आखिरकार इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिल गई है। लंबे कानूनी संघर्ष और मेडिकल जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट के आदेश के बाद हरीश के जीवन रक्षक उपकरण हटाने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनकी इस दुनिया से विदाई की तैयारी दिखाई देती है। जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं।
वायरल वीडियो में एक महिला हरीश के सिर पर हाथ फेरते हुए बेहद भावुक स्वर में उन्हें सभी को माफ करते हुए जाने की बात कहती नजर आती है। वह उनसे कहती है कि अगर किसी से कोई गलती हुई हो तो उसे माफ कर दें और सभी से माफी मांगते हुए विदा लें। इस दौरान हरीश कुछ प्रतिक्रिया देने की कोशिश करते दिखते हैं, उनकी जुबान हल्की हिलती है, लेकिन शारीरिक स्थिति इतनी गंभीर है कि उनके मुंह से कोई आवाज नहीं निकल पाती। यह दृश्य सोशल मीडिया पर लोगों को झकझोर रहा है।
राजनगर एक्सटेंशन स्थित घर से एम्स शिफ्ट होने से पहले सोशल मीडिया पर 22 सेकंड का हरीश के घर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मां निर्मला देवी अपने बेटे के सिरहाने बैठी नजर आ रही हैं।
दरअसल, हरीश राणा कभी इंजीनियरिंग के होनहार छात्र थे। करीब 13 साल पहले एक गंभीर हादसे के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। दुर्घटना के बाद वह परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (Permanent Vegetative State) में चले गए। यह ऐसी अवस्था होती है जिसमें व्यक्ति का शरीर तो जीवित रहता है, लेकिन मस्तिष्क की सक्रियता लगभग समाप्त हो जाती है। हरीश न तो बोल सकते थे, न चल सकते थे और न ही अपने आसपास की गतिविधियों को महसूस कर पाते थे।
पिछले 13 वर्षों से उनका जीवन पूरी तरह मेडिकल उपकरणों और ट्यूब के सहारे चल रहा था। इस दौरान परिवार उम्मीद और दर्द के बीच संघर्ष करता रहा। हरीश के पिता ने बताया कि बेटे के जीवन रक्षक उपकरण हटाने का फैसला लेना उनके जीवन का सबसे कठिन निर्णय है, लेकिन बेटे की पीड़ा को देखते हुए परिवार ने यह कदम उठाने का फैसला किया।
लंबी कानूनी प्रक्रिया और कई मेडिकल बोर्ड की रिपोर्टों की समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी। अदालत ने अपने आदेश में परिवार की सहमति और डॉक्टरों की राय को अहम आधार माना।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हरीश राणा को दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) के पेलिएटिव केयर विभाग में भर्ती कराया जाए। यहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी देखभाल करेगी और निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत धीरे-धीरे जीवन रक्षक उपकरण हटाए जाएंगे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पोषण देने के लिए उपयोग की जाने वाली पीईजी ट्यूब (PEG Tube) भी मेडिकल उपचार की श्रेणी में आती है। इसलिए इसे हटाना भी पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाएगा।
डॉक्टरों के अनुसार, कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए हरीश के जीवन रक्षक उपकरणों को धीरे-धीरे और मानवीय तरीके से हटाया जाएगा, ताकि उनकी गरिमा बनी रहे और उन्हें किसी प्रकार की पीड़ा न हो।
इस घटना ने एक बार फिर इच्छामृत्यु को लेकर समाज में बहस को तेज कर दिया है। वहीं, वायरल वीडियो ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया है और लोग हरीश तथा उनके परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं।











