नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने साइबर फ्रॉड और डिजिटल ऋण से जुड़े अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 87 अवैध लोन देने वाले मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक कर दिया है। सोमवार को लोकसभा में कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने इस संबंध में आधिकारिक जानकारी दी।
मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध किसी भी सूचना या ऐप को ब्लॉक करने का अधिकार है। इसी प्रक्रिया के तहत अब तक कुल 87 ऐसे ऐप्स की पहचान कर उन्हें प्रतिबंधित किया गया है, जो बिना अनुमति या अवैध रूप से ऑनलाइन लोन उपलब्ध करा रहे थे।
कंपनियों पर भी सख्त कार्रवाई का संकेत
एक लिखित जवाब में मल्होत्रा ने कहा कि कंपनियों अधिनियम, 2013 के तहत समय-समय पर जांच, अकाउंट बुक्स का निरीक्षण और अन्य नियामकीय कार्रवाई की जाती है। इसमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जो अवैध मोबाइल ऐप्स के माध्यम से ऑनलाइन लोन देने की गतिविधियों में शामिल हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि, जब भी कंपनियों अधिनियम, 2013 के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। कानून के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के पास है, और मंत्रालय लगातार ऐसे मामलों की निगरानी कर रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी, जबरन वसूली और डेटा के दुरुपयोग जैसे जोखिमों से बचाया जा सके।
क्यों बढ़ी निगरानी?
पिछले कुछ वर्षों में फर्जी या अनियमित ऐप्स के जरिए ऑनलाइन उधार देना तेजी से बढ़ा है। कई मामलों में अत्यधिक ब्याज, धमकाने वाली वसूली, और निजी डेटा के दुरुपयोग जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने यह निर्णायक कदम उठाया है।
भारत सरकार ने अवैध लोन ऐप्स पर कसा शिकंजा, 87 Apps किए ब्लॉक












