रांची: राज्य सरकार के द्वारा तकरीबन 50 बार लोकायुक्त सहित अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की बात कर देने की बात की जाती रही लेकिन नतीजा शिकार रहा लेकिन इस बार झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत इस बार इस सख्त नजर आ रही है। हाई कोर्ट ने कहा है कि 1 अप्रैल तक लोकायुक्त सहित अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति नहीं होती है तो सख्त आदेश दिया जाएगा।
झारखंड हाई कोर्ट में लोकायुक्त सहित अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि लोकायुक्त की नियुक्ति इस माह कर ली जाएगी। इसके लिए सीएम की अध्यक्षता में 25 मार्च को बैठक बुलाई गई है। इसलिए कुछ और समय दिया जाए।
अदालत ने सरकार को अंतिम मौका देते हुए एक अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की है। कोर्ट ने कहा यदि नियुक्ति नहीं की गई, तो एक अप्रैल को सख्त आदेश जारी किया जाएगा।
प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने इसका विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार अब तक इस मामले में 50 से अधिक बार समय ले चुकी है, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
हर बार सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जाती है, लेकिन वर्ष 2020 से अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। एक बार फिर सरकार नई बात लेकर कोर्ट पहुंची है।
नियुक्ति नहीं तो जारी होगा सख्त आदेश
प्रार्थियों ने कोर्ट से सख्त आदेश जारी करने का आग्रह किया। कोर्ट ने कहा यदि नियुक्ति नहीं की गई, तो एक अप्रैल को सख्त आदेश जारी किया जाएगा।
पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि मामले में राज्य सरकार का रवैया ठीक नहीं है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार संवैधानिक प्राधिकारों के पदों पर नियुक्ति करने की नीयत नहीं रखती है।
पिछले चार साल से सरकार ने इन पदों को निष्क्रिय बना कर रखा है और सरकार हर बार कोई परेशानी बता मामले को टाल रही है।
अगर जल्द नियुक्ति नहीं की जाती है, कोर्ट परमादेश (मेंडमस) जारी करेगी। बता दें कि इसको लेकर हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन और राजकुमार सहित अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जिसमें रिक्त पड़े संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की मांग की गई है।











