नई दिल्ली: निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) के पहले मामले के रूप में चर्चित गाजियाबाद के हरीश राणा का मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) के पैलिएटिव केयर वार्ड में अंतिम सांस ली। वे पिछले करीब 13 वर्षों से अचेत अवस्था (कोमा) में थे। ये देश का पहला मामला है, जिसमें किसी को इच्छामृत्यु दी गई है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि उन्हें एम्स के पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कर चिकित्सकीय उपचार को क्रमिक रूप से वापस लिया जाए, ताकि उनकी जीवन-यात्रा बिना अनावश्यक पीड़ा के समाप्त हो सके।
कोर्ट के आदेश के बाद 14 मार्च को हरीश को एम्स में भर्ती कराया गया। चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में 15 मार्च से उनका लिक्विड डाइट बंद कर दिया गया, जबकि 17 मार्च से पानी देना भी रोक दिया गया। पिछले कई दिनों से उन्हें किसी प्रकार का पोषण नहीं दिया जा रहा था। हालांकि, उन्हें दर्द से राहत देने के लिए लगातार पेन-रिलीफ दवाएं दी जा रही थीं, ताकि अंतिम समय में उन्हें कष्ट न हो।
हरीश राणा ने वर्ष 2010 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया था। वर्ष 2013 में अंतिम वर्ष की पढ़ाई के दौरान रक्षाबंधन के दिन एक दर्दनाक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। फोन पर बात करते समय वह पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया, बाद में दिसंबर 2013 में दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया (चारों अंगों का लकवा) से पीड़ित बताया, जिसके बाद वे पूरी तरह बिस्तर पर निर्भर हो गए और अचेत अवस्था में चले गए।
लंबे समय तक असहनीय स्थिति में रहने के कारण हरीश के परिजनों ने इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की। 8 जुलाई 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब आठ महीने की सुनवाई के बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी। अदालत ने इसे मानवीय दृष्टिकोण से लिया और गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार को प्राथमिकता दी।












