निरंजन प्रसाद
गारु: बारेसांड प्रभारी वनपाल परमजीत तिवारी के स्थानांतरण की खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली, वैसे ही पूरे इलाके में असंतोष की लहर दौड़ गई। खबर मिलते ही उनके बिट क्षेत्र के सैकड़ों महिलाएं और पुरुष सड़क पर उतर आए और एक स्वर में तिवारी जी के समर्थन में आवाज बुलंद की।ग्रामीणों का कहना है कि परमजीत तिवारी के कार्यकाल में जंगल और गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। उनके आने के बाद अब ग्रामीणों को रोजगार की तलाश में केरल और तमिलनाडु जैसे दूरस्थ राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ता। तिवारी जी ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने का सराहनीय कार्य किया है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने भावुक होते हुए कहा कि तिवारी जी केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि हमारे परिवार के सदस्य की तरह हैं। वे हमारे सुख-दुख में दिन-रात साथ खड़े रहते हैं।”ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि उनका स्थानांतरण हुआ तो जंगल फिर से असुरक्षित हो जाएगा, अवैध कटाई बढ़ेगी और वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगेगा।ग्रामीणों के अनुसार, परमजीत तिवारी सुबह से देर रात तक जंगल का भ्रमण करते रहते हैं। उन्होंने अपने घर-परिवार से दूर रहकर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है। सीमित संसाधनों के बावजूद अकेले ही पूरे क्षेत्र की निगरानी कर वे जंगल को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि रेंजर अर्जुन बड़ाइक के बाद लंबे अंतराल में तिवारी जी जैसे संवेदनशील, ईमानदार और कर्मठ अधिकारी मिले हैं, जो सभी ग्रामीणों को साथ लेकर चलते हैं और विश्वास के साथ कार्य करते हैं।
परमजीत तिवारी के समर्थन में मायापुर, बारेसांड, रामसेली, डांडकोचा,पहाड़कोचा, हुडूगढ़ा, सुग्गाबांध, गोयरा, बंधुआ, तीसिया, बरदारा, सेमरखांड, चेतमा सहित कई गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर खड़े हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थानांतरण पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि क्षेत्र का विकास, रोजगार और जंगल की सुरक्षा तभी संभव है जब तिवारी जी यहीं कार्यरत रहें।














