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बरुआटांड़ में मराड.बुरु बाहा बोंगा समिति की ओर से फाल्गुन मुलूक् मोड़ें माहा में बाहा पोरोब संपन्न

On: February 26, 2026 2:05 PM
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बोकारो :चास प्रखंड के अन्तर्गत कनारी पंचायत के गांव बरुआटांड़ में मराड.बुरु बाहा बोंगा समिति की ओर से फाल्गुन मुलूक् मोड़ें माहा में बाहा पोरोब (सरहूल पूजा) संपन्न किया गया।

बरुआटांड़ ग्राम प्रधान सह माराड.बुरु बाहा बोंगा समिति के अध्यक्ष उपेंद्र हेम्बरम और नायके(पूजारी) कालीचरण किस्कू द्वारा जाहेरथान में जाहेर आयो,मराड.बुरु, परगना बाबा, लुगूबुरू बाबा,लुगूआयो आदि ईष्ट देवी देवताओं को सखुआ फूल और महुआ फूल अर्पित किया और सखुआ वृक्ष पर जलाभिषेक कर प्रकृति, पर्यावरण और सरना धर्म बचाने का संकल्प लिया।

मौके पर मौजूद बरुआटांड़ गांव के प्राणिक सह सेंगेल जिला अध्यक्ष सह बोकारो जोनल हेड सुखदेव मुर्मू ने कहा कि द्वारा आदिवासीयों का सरना धर्म प्रकृति पूजक बाहा बोंगा (सरहूल पूजा) आदिवासी समाज में एकता और विजय हासिल करने के लिए संताल आदिवासियों का हक,अधिकार,हासा(भूमि), भाषा,जाति, धर्म (मराड.बुरु,लुगुबुरु), इज्जत, आबादी, रोजगार,चास-वास को बचाने, पहचान बनाने एवं उसे समृद्ध करने हेतू बृहद समाजिक एकता (समाजिक व्यवस्था में संवैधानिक एवं जनतांत्रिक सुधार के साथ) राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक (पर्व-त्योहारों) एकजूटता एवं एकरुपता लाने के उद्देश्य से फाल्गुन मूलूक्‌ मोड़ें माहा में आदिवासीयों का सरना धर्म प्रकृति पूजक बाहा बोंगा (सरहूल पूजा) किया गया।

बाहा पोरोब में मुख्य अतिथि कनारी पश्चिम पंचायत के मुखिया रजनी देवी एवं विशिष्ट अतिथि आदिवासी सेंगेल अभियान के प्रदेश संयोजक सह बोकारो जोनल परगना करमचंद हांसदा मौजूद रहे।
कनारी पश्चिम पंचायत के मुखिया रजनी देवी ने कहा कि आदिवासी समुदाय का सबसे पवित्र त्योहार बाहा पोरोब ( फूलों का उत्सव) बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है,जब तक जाहेरथान में नायके द्वारा सखुआ और महुआ फूलों की पूजा नहीं होती,तब तक इन नए फूलों का उपयोग वर्जित है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि प्रकृति से पहले हमें उसका आभार मनाना चाहिए। मुखिया रजनी देवी ने कहा कि बहुत ही जल्द जाहेरथान की चारदीवारी और जल व्यवस्था के लिए एक डीप बोरिंग या चपाकल की व्यवस्था की जाएगी।

विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद आदिवासी सेंगेल अभियान के प्रदेश संयोजक सह बोकारो जोनल परगना करमचंद हांसदा ने कहा कि आदिवासियों कि प्रकृति पूजक भाषा संस्कृति को बचाना है तो हर हाल में सरना धर्म कोड को लागू करना होगा और आठवीं अनुसूची में शामिल राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संताली भाषा को झारखंड में प्रथम राजभाषा बनाना होगा।

तत्पश्चात वहीं सभी लोग जाहेर आयो और मारांड.बुरु के चरणों में नतमस्तक हुए। और सरना धर्म एकता प्रार्थना किया गया और मांदर एवं नगाडे़ की थाप, पारंपरिक परिधान में जाहेर नृत्य किया गया।

बाहा बोंगा परब में पूर्व माझी हाड़म गुहीराम हेम्बरम, भीम मुर्मू, पूर्व जिला परिषद गुलाबी देवी,सेंगेल से झारखंड प्रदेश संयोजक जयराम सोरेन, चंदनकियारी प्रखंड सेंगेल अध्यक्ष राजेश मुर्मू, बोकारो जिला सेंगेल संयोजक गोपीनाथ मुर्मू, पेटरवार प्रखंड सेंगेल बी.डी.ओ.विजय मरांडी,राखो किस्कू,
बिरेंद्र सोरेन,बिन्तोष टुडू,बुटन बेसरा,मनोज किस्कू,चेतलाल किस्कू,संजूल मुर्मू, छोटेलाल हेम्बरम, बिनोद हेम्बरम,दशरथ सोरेन, जीतराम बेसरा, रामचंद्र बेसरा, नागेश्वर मुर्मू, मुकेश किस्कू,मुंगेश्वर सोरेन, बिरेंद्र नाथ सोरेन, शिवराम किस्कू, सावित्री मुर्मू,काजल हेम्बरम, सोनिया किस्कू, आदि सैकड़ों महिला पुरुष शामिल थे।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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