अभय मांझी
लातेहार: जिले के मनिका प्रखंड अंतर्गत कोपे पंचायत में मनरेगा योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि मनरेगा कर्मियों और बिचौलियों की सांठ-गांठ से योजनाओं में अनियमितता की खुली छूट मिल रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 और 2025-26 में स्वीकृत आम बागवानी और इसीबी योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ी की गई है। पंचायत स्तर पर फर्जी मास्टर रोल लगाकर प्रति सप्ताह लाखों रुपये की निकासी की जा रही है। इसमें पंचायत के मुखिया, पंचायत सचिव और रोजगार सेवक की मिलीभगत बताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इसीबी की दर्जनों योजनाओं में बिना काम किए ही राशि निकाल ली गई है। पंचायत में एक सौ से ज्यादा इसीबी योजनाएं कागज पर पूरी दिखा दी गई हैं, जबकि धरातल पर इनका कोई अस्तित्व नहीं है। यही हाल आम बागवानी योजनाओं का भी है, जहां लगाए गए आम के पौधे देखरेख के अभाव में सूख चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत का कामकाज मुखिया की जगह उनके पति देखते हैं। पंचायत सचिव और रोजगार सेवक ने भी निजी सहायकों को काम पर लगा रखा है, जिनकी प्राथमिकता योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं, बल्कि वसूली है।
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि स्थानीय संवाददाताओं द्वारा खबर प्रकाशित करने की बात पर मुखिया पति ने धमकी दी कि यदि समाचार छपा तो पंचायत में लोगों का काम बंद कर दिया जाएगा।
कोपे पंचायत पहले से ही मनरेगा घोटालों के कारण सुर्खियों में रहा है। जब भी मामला उजागर होता है, दोषी कर्मियों पर केवल आर्थिक दंड लगाकर कार्रवाई पूरी कर दी जाती है। आश्चर्य की बात यह है कि लगे हुए दंड की भरपाई भी फर्जी मास्टर रोल बनाकर ही कर ली जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत के लगभग सभी जनप्रतिनिधि मनरेगा भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और कई बार इन पर अखबारों में खबरें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि पंचायत की ईमानदारीपूर्वक जांच की जाए तो एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।
अब ग्रामीणों की उम्मीदें जिला प्रशासन से जुड़ी हैं। उन्होंने मीडिया के माध्यम से जिला पदाधिकारी से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने से बच सके।