नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उनकी सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। अंद्राबी के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में कुल 33 मामले दर्ज हैं, जबकि फहमीदा और नसरीन के खिलाफ क्रमशः 9 और 5 मामले दर्ज हैं।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए दोषियों को कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है। अदालत ने अंद्राबी को UAPA की विभिन्न धाराओं, जिनमें आपराधिक साजिश रचना और प्रतिबंधित आतंकी संगठन की सदस्यता शामिल है, के तहत दोषी ठहराया।
जांच में सामने आया कि अंद्राबी ने अपने संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत (DeM) के माध्यम से भारत विरोधी माहौल तैयार करने, समाज में वैमनस्य फैलाने और अलगाववाद को बढ़ावा देने का काम किया। यह संगठन लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था और भारत सरकार द्वारा पहले ही प्रतिबंधित घोषित किया जा चुका है।
मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत से अंद्राबी के लिए उम्रकैद की सजा की मांग की थी। एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने अपने संगठन के जरिए जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने और भारत के खिलाफ गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम किया।
आसिया अंद्राबी कश्मीर की प्रमुख महिला अलगाववादी नेताओं में गिनी जाती रही हैं और वह ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से भी जुड़ी रही हैं। उनके संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत ने लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग उठाई है। आसिया अंद्राबी का विवाह 1990 में कासिम फक्तू ( हिजबुल मुजाहिदीन के संस्थापक सदस्य ) से हुआ था। उनके पति 1992 से हत्या के आरोप में जेल में हैं।
अंद्राबी का नाम कई विवादित घटनाओं से जुड़ा रहा है। वर्ष 2015 में उन्होंने कश्मीर में पाकिस्तान का झंडा फहराने और उसका राष्ट्रगान गाने की घटना को लेकर सुर्खियां बटोरी थीं। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाई और अलगाववादी गतिविधियों को समर्थन दिया।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अंद्राबी को ‘भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ समेत कई गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया था। इसके बाद से यह मामला अदालत में लंबित था, जिस पर अब फैसला सुनाया गया है।














