यमन में फंसी केरल की नर्स निमिषा की फांसी टलने की उम्मीदें खत्म? जानिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को क्या बताया

On: July 14, 2025 2:19 PM

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नई दिल्ली: केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। आज से ठीक 2 दिन बाद यानी 16 जुलाई निमिषा की फांसी की तारीख निर्धारित की गई है। केंद्र सरकार ने निमिषा की फांसी रोकने का हर मुमकिन प्रयास किया, लेकिन सरकार को इसमें नाकामयाबी ही हाथ लगी। निमिषा की फांसी पर अब केंद्र सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन हम जो कर सकते थे हमने किया। भारत सरकार ने साफ किया कि निमिषा को बचाने का केवल एक तरीका है, वह है मृतक परिवार से ‘ब्लड मनी’ या मुआवजा स्वीकार करवाना। केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर.वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि मृतक के परिवार को 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.5 करोड़) रुपये के मुआवजे का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। भारत सरकार ने इस मामले में यमन सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और निमिषा के बचाव के लिए पूरी कोशिश की। लेकिन यमन के कानून और स्थानीय परिस्थितियों के चलते सरकार की सहायता सीमित रही।
निमिषा को क्यों मिली फांसी की सजा?
निमिषा प्रिया मूल रूप से केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोडे की रहने वाली हैं। 2017 में यमन में उनके व्यापारिक साझेदार और यमनी नागरिक तलाल अब्दो की हत्या हुई थी, जिसमें उन्हें दोषी ठहराया गया। यमन की अदालतों ने उनकी अपील खारिज कर दी और 16 जुलाई 2025 को फांसी की सजा लागू करने का आदेश दिया।