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लैंड फॉर जॉब घोटाला: लालू परिवार को बड़ा झटका, कोर्ट ने 40 से अधिक आरोपियों पर तय किए आरोप

On: January 9, 2026 12:24 PM
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नई दिल्ली: लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में लालू प्रसाद यादव समेत 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया और माना कि मामले में मुकदमे (ट्रायल) के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
अदालत के आदेश के बाद अब मामले में नियमित ट्रायल शुरू होगा, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) आरोपियों के खिलाफ गवाहों और दस्तावेजी सबूतों को पेश करेगी। इस केस की अगली सुनवाई 29 जनवरी को तय की गई है।


लालू, राबड़ी और मीसा पर आरोप तय


कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव समेत 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। लालू यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा। वहीं, परिवार के अन्य सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप तय किए गए हैं।


अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इनकी विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। कोर्ट के अनुसार, प्रथम दृष्टया ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाना उचित है।


सीबीआई का आरोप क्या है


सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई। यह नियुक्तियां रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र, जबलपुर जोन में की गई थीं। जांच एजेंसी के मुताबिक, नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीन लेकर उसे लालू परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर ट्रांसफर कराया गया। सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि इस मामले में दाखिल चार्जशीट में कुल 103 आरोपियों के नाम शामिल हैं, जिनमें से अब तक पांच की मौत हो चुकी है।


आरोपियों का पक्ष


मामले में नामजद सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।


अब ट्रायल के दौरान सीबीआई अपने गवाहों के बयान दर्ज कराएगी और दस्तावेजी साक्ष्य पेश करेगी। कोर्ट की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। यह मामला न सिर्फ बिहार की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी खासा महत्व रखता है, क्योंकि इसमें एक बड़े राजनीतिक परिवार के कई सदस्य कटघरे में हैं।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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