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लातेहार: गर्भवती महिला को 8 किमी तक चारपाई में लादकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया, जानें पूरा मामला

On: August 28, 2024 2:35 PM
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निरंजन प्रसाद

गारू (लातेहार): 21वीं सदी के भारत में अगर किसी मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की जगह चारपाई पर लिटाकर उसे ले जाने की मजबूरी हो तो इसे सरकार की विडंबना और उदासीनता ही कहा जाएगा. गौरतलब है कि लातेहार जिले के महुआडांड़ इलाके के तिसिया गांव के ग्रामीणों की स्वास्थ्य सुविधाएं आज भी खाट पर टिकी है.
अक्सी पंचायत के घोर नक्सल प्रभावित गांव तिसिया की कोरवा समुदाय की 30 वर्षीय महिला ज्योति कोरवा को चार लोगों ने चारपाई के सहारे डोली बनाकर 8 किमी पैदल चलकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया.

झारखण्ड वार्ता से बातचीत में महिला के पति सुदेश्वर कोरवा ने बताया कि सोमवार रात्रि में उसके पत्नी को प्रसव का पीड़ा शुरू हो गया. पत्नी दर्द से रातभर परेशान रही. मंगलवार को 108 में कॉल करने के बाद एम्बुलेंस गाँव तक जाने से इंकार कर दिया. गांव वालों की सहयोग से बुढ़ा नदी और टेटूक नदी को चारपाई की डोली से पार कर शाम 5 बजे एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया. जहाँ से स्वास्थ्य केंद्र महुआडांड़ ले जाया गया. जहां मंगलवार की शाम 7 बजे उस आदिम जनजाति कोरवा समुदाय की महिला ज्योति ने जुड़वा लड़के को जन्म दिया।

बीपीडीपी प्रोजेक्ट के तहत मिलने वाली सुविधा पर उठी सवाल

बूढ़ा पहाड़ डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत प्रभावित गांव में 100 करोड़ की राशि से विकास कार्य करने की घोषणा हेमंत सोरेन ने किया था. इस प्रोजेक्ट के तहत अक्सी पंचायत के तिसिया गांव का भी चयन हुआ है. घोषणा की 1 साल के बाद भी गांव की स्थिति बदतर ही दिख रहा है. तिसिया के ग्रामीणों ने कहा कि जहां तक उनकी जानकारी है तिसिया गांव की पहली महिला ज्योति कोरवा है जिसका प्रसव गांव से नहीं बल्कि अस्पताल में हुआ है.

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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