वडोदरा: गुजरात के वडोदरा जिले के मलसर गांव से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक साल के मासूम बच्चे की श्वासनली (विंडपाइप) में एलईडी बल्ब फंसा हुआ पाया गया। बच्चा पिछले छह हफ्तों से तेज बुखार और लगातार खांसी से परेशान था, लेकिन लंबे समय तक इसका सही कारण सामने नहीं आ पाया।
परिजनों के अनुसार, बच्चे को शुरुआत में कई निजी अस्पतालों में दिखाया गया, जहां डॉक्टरों ने इसे निमोनिया मानकर इलाज शुरू किया। एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाइयों के बावजूद बच्चे की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। समय बीतने के साथ उसकी परेशानी और बढ़ती चली गई, जिससे परिवार की चिंता भी गहराती गई।
जब निजी अस्पतालों में इलाज विफल रहा, तो परिजन बच्चे को वडोदरा के गोटरी स्थित सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां ईएनटी (कान-नाक-गला) विशेषज्ञों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए विस्तृत जांच की। डॉक्टरों को श्वासनली में किसी बाहरी वस्तु के फंसे होने का शक हुआ, जिसके बाद बच्चे का एक्स-रे कराया गया।
एक्स-रे रिपोर्ट में श्वासनली के भीतर किसी ठोस वस्तु की मौजूदगी के संकेत मिले। इसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत ब्रोंकोस्कोपी करने का फैसला लिया। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने श्वासनली के अंदर गहराई में फंसे करीब एक सेंटीमीटर लंबे एलईडी बल्ब को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।
इलाज करने वाले ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. हिरन सोनी ने बताया कि वस्तु लंबे समय तक श्वासनली में फंसी रहने के कारण उसके ऊपर त्वचा जैसी परत तक उग आई थी, जिससे ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। उन्होंने कहा कि अगर और देर होती तो बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
सफल ऑपरेशन के बाद बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हुआ और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि छोटे बच्चों के आसपास छोटी-छोटी वस्तुएं न छोड़ें, क्योंकि बच्चे खेल-खेल में उन्हें मुंह में डाल सकते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।














