बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए 22 वर्षीय राम गोपाल मिश्रा हत्या कांड का न्यायालय ने शुक्रवार को अंतिम फैसला सुना दिया। अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा की अदालत ने मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा और अन्य 9 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
13 आरोपियों में 10 दोषी, 3 बरी
अदालत ने 9 दिसंबर को इस मामले में दर्ज कुल 13 आरोपियों में से 10 को दोषी करार देते हुए तीन को सबूतों के अभाव में बरी किया था। दोषी ठहराए गए आरोपियों में अब्दुल हमीद, फहीम, सरफराज, तालिब, सैफ, जावेद, जीशान, ननकऊ, शोएब और मारुफ शामिल हैं। इनमें सरफराज को फांसी जबकि बाकी नौ को उम्रकैद मिली।
शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बताया कि मामले में सिर्फ 13 महीने 26 दिन में ट्रायल पूरा हो गया, जो तेज न्याय का एक मिसाल है।
कैसे भड़की थी हिंसा?
यह घटना महसी थाना क्षेत्र के महराजगंज में 13 अक्टूबर 2024 को हुई थी। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे पर बज रहे गानों को लेकर विवाद बढ़ गया। विवाद ने जल्द ही पथराव और फायरिंग का रूप ले लिया। इसी दौरान राम गोपाल मिश्रा को गोली लगी और उनकी मौके पर मौत हो गई थी।
किन धाराओं में सजा हुई?
दोषियों पर BNS की धारा 103(2) (मॉब लिंचिंग में हत्या) के तहत कार्रवाई हुई, जिसमें फांसी या आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अन्य धाराएं, 191(2), 191(3), 190, 109(2), 249, 61(2) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 30 भी लगाई गई थीं।
परिवार अभी भी सभी आरोपियों को फांसी चाहता है
9 दिसंबर को जब तीन आरोपियों, खुर्शीद, शकील और अफजल को बरी किया गया, तब मृतक की पत्नी रोली मिश्रा ने कहा था, मेरे पति के हत्यारों को फांसी दो, तभी न्याय मिलेगा। बरी किए गए तीन भी दोषी हैं, उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए। परिवार ने आज भी सभी दोषियों को मौत की सजा देने की मांग दोहराई।
प्रशासन अलर्ट, इलाके में भारी फोर्स तैनात
संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। घटना के बाद आरोपियों पर रासुका (NSA) भी लगाई गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही पीड़ित परिवार को कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दे चुके हैं।
बहराइच हिंसा: राम गोपाल मिश्रा हत्याकांड में मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा, 9 दोषियों को उम्रकैद














