सूरत: गुजरात में मकर संक्रांति का पर्व हर साल की तरह इस बार भी पूरे उत्साह और रंग-बिरंगी पतंगों के साथ मनाया गया। छतों से लेकर सड़कों तक आसमान पतंगों से भरा रहा। लेकिन इस उल्लास भरे त्योहार ने कई परिवारों को ऐसा गहरा जख्म दिया, जो शायद जिंदगी भर नहीं भर पाएगा। जानलेवा पतंग की डोर यानी मांझे ने राज्य भर में अब तक 10 लोगों की जान ले ली है, जबकि सैकड़ों लोग घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं।
सबसे दिल दहला देने वाली घटनाएं सूरत से सामने आई हैं, जहां जहांगीरपुरा और जिलानी ब्रिज पर हुए हादसों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है।
साइकिल चलाते मासूम की मांझे से मौत
सूरत के जहांगीरपुरा इलाके की आनंद विला सोसाइटी में एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ। यहां सोसाइटी परिसर में साइकिल चला रहा 8 वर्षीय मासूम अचानक मौत का शिकार हो गया। बताया जा रहा है कि आसमान से कटकर आई पतंग की धारदार डोर बच्चे के गले में फंस गई। मांझा इतना तेज और घातक था कि बच्चे का गला गहराई तक कट गया।
परिजन और स्थानीय लोग तुरंत बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए दौड़े, लेकिन अत्यधिक खून बहने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चंद पलों में उजड़ा पूरा परिवार
दूसरी घटना ने मानवता को झकझोर कर रख दिया। सूरत के जिलानी ब्रिज पर एक खुशहाल परिवार पलभर में खत्म हो गया। मूल रूप से कोलकाता का रहने वाला यह परिवार बाइक से ब्रिज पार कर रहा था। तभी अचानक बाइक चला रहे पिता के गले में पतंग का मांझा फंस गया। मांझे से बचने की कोशिश में बाइक का संतुलन बिगड़ गया और तेज रफ्तार बाइक ब्रिज की रेलिंग से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिता, मां और उनकी मासूम बेटी बाइक समेत नीचे खड़े एक रिक्शा पर गिर पड़े। हादसे में पिता और बेटी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल मां ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस और प्रशासन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों शवों को विमान के जरिए उनके पैतृक निवास कोलकाता भेज दिया है।
प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बिक रहा जानलेवा मांझा
गौरतलब है कि गुजरात में चाइनीज मांझे और कांच लगे धागों पर पहले से ही प्रतिबंध है, इसके बावजूद इनका खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक, राज्य में अब तक मांझे की चपेट में आकर 10 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
पुलिस ने अब सख्ती बढ़ाते हुए जानलेवा मांझा बेचने वालों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। जगह-जगह छापेमारी कर अवैध मांझा जब्त किया जा रहा है। हालांकि, जिन परिवारों ने इस त्योहार पर अपने बच्चों और अपनों को खो दिया है, उनके लिए मकर संक्रांति अब कभी खुशी का पर्व नहीं रह पाएगा, बल्कि जिंदगी भर का दर्द और डरावनी याद बनकर रह गई है।














