सिल्ली:- शब-ए-बारात पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने पूर्वजों की कब्रगाह पर मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाकर फातिहा पढ़ी एवं दुआएं भी पढ़ी। समुदाय के लोगों ने मस्जिदों और घरों में पूरी रात इबादत की। इबादत की रात में परवरदिगार से अपने और पूर्वजों के गुनाहों की मांगी माफी।शब-ए-बरात पर दोपहर बाद से ही मुस्लिम इलाकों की रौनक देखते बन रही थी। घरों को झालर आदि से सजाया गया, युवाओं ने आतिशबाजियां भी की। इधर मस्जिद के मौलाना ने बताया कि पिछले साल किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने एवं आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बारात कहा जाता है। पूरी रात मस्जिदों में चहल पहल रही।सिल्ली आसपास के क्षेत्रों में पूरी रात लोग कुरान की तिलावत करते रहे।मौलाना ने शब ए बारात का महत्व बताते हुए कहा की खुदा पाक के करम की दौलत तो हर रात बरसती है लेकिन इस रात और ज्यादा बरसती है।खुदा पाक की रहमतों और इनायतों का उतरना इस रात ज्यादा होता है। सभी लोग कब्रस्तान जाकर अपने रिश्तेदारों के लिए मगफिरत की दुवा करते है।छोटा मुरी जामा मस्जिद के सेक्रेटरी जनाब अब्दुल हमीद, सदर जनाब मोहम्मद जाफर,शेख अशरफ अली,महताब आलम,तरन्नुम फैजी, कुटाम मस्जिद के सदर साहब अब्दुल शकूर, मोहम्मद काबिल जामा मस्जिद के सदर अब्दुल वाहिद, समसुल अंसारी,कलवाडीह के सेक्रेटरी मुजफ्फर हुसैन,एजाज अंसारी, सुलमजुड़ी के सेक्रेटरी साहेब ओर छोटा मुरी बड़ी मस्जिद के सेक्रेटरी जनाब मजीद आलम ने बहुत संयोग किया ।
शब-ए-बारात पर मुस्लिम समुदाय ने की इबादत, पूर्वजों की कब्रगाह पर जलाई मोमबत्ती










