हजारीबाग:- जैनियों का सबसे बडा महापर्व दस दिवसीय दशलक्षण पर्व का आज आठवां दिन उत्तम तप धर्म ,भाद्र शुक्ल एकादशी पर हुई श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा व उत्तम तप धर्म की पूजा पाठ।

अहले सुबह प्रातः ५ बजे से ही भक्तगण की उपस्थित दोनों दिगम्बर जैन मंदिर में शुरू हो जाता है। बड़ा बाजार दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे तेरहदीप महामंडल विधान में लोग बड़े ही भक्ति उत्साह संगीतमय पूजन पाठ पंडित नयन जी शास्त्री के सानिध्य में वाद्ययंत्रों के द्वारा कर रहे हैं।

प्रभारी विजय लुहाड़िया ने बताया कि सामूहिक अभिषेक व श्री जी की शांतिधारा के बाद प्रातः ८.३० बजे पंडित नयन जी शास्त्री का मंगल प्रवचन बड़ा बाजार मंदिर में होता है। आज उत्तम तप धर्म के दिन पंडित जी ने अपने वाचन में उसकी महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अगर हमें कर्मों का क्षय करना है और संसार की दुखों से बचाना है तो हमें कर्मों को काटने के लिए तप करना ही पड़ेगा।

बिना तप के कर्मों की निर्जरा नहीं होगी तब अंतरंग और बहिरंग के भेद से 12 प्रकार का होता है जिसको मुनि एवं श्रावक अपनी शक्ति के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि आत्मलीनता द्वारा विकारों पर विजय प्राप्त करना तप है। सम्यक दर्शन के बिना किया गया समस्त तप निरर्थक है। इच्छाओं के निरोधरूप शुद्घोपयोगरूपी वितराग भाव ही सच्चा तप है। पंडित जी ने कहा की तप दो प्रकार का माना गया है । बहिरंग तप ६ प्रकार के होते हैं तथा अंतरंग तप भी ६ प्रकार के होते हैं।

इस प्रकार कुल तप १२ प्रकार के होते हैं इस पर उन्होंने अपना प्रकाश डाला। दोपहर में बाड़म बाजार दिगंबर जैन मंदिर में पंडित जी तत्वार्थसूत्र का वाचन कर रहे हैं जिसमें १० अध्यायों पर अपना प्रकाश डाल रहे हैं। संध्या में महाआरती ,णमोकार जाप , भक्तामर पाठ तथा पंडित जी द्वारा शास्त्र वाचन का कार्यक्रम हो रहा है। तत्पश्चात रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन में बच्चों के पाठशाला के द्वारा बहुत ही सुंदर आध्यात्मिक पेशकश की जा रही है। पाठशाला की संयोजक विपिन छाबड़ा हुआ सोना विनायका अपनी पूरी टीम के साथ बहुत ही जानदार शानदार बच्चों की प्रस्तुति कराई।समाज के पदाधिकारी विजय लुहाडीया ने बताया कि आज से अनंत व्रत प्रारंभ हुआ। कल मंगलवार भाद्रपद द्वादशी उत्तम त्याग धर्म का दिन होगा व रत्नत्रय व्रत प्रारंभ होगा।










