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नीतीश कुमार ने खींचा हिजाब, आहत होकर डॉक्टर ने छोड़ा बिहार; नौकरी भी ठुकराई

On: December 17, 2025 8:49 PM
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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक सरकारी कार्यक्रम में हुई घटना ने महिला डॉक्टर की जिंदगी को गहरे सदमे में डाल दिया है। मंच पर हिजाब हटवाए जाने की घटना के बाद डॉक्टर नुसरत परवीन खुद को इतना अपमानित और आहत महसूस कर रही हैं कि उन्होंने न सिर्फ पटना छोड़ दिया, बल्कि बिहार सरकार की नौकरी ज्वॉइन करने से भी फिलहाल इनकार कर दिया है।

डॉ. नुसरत परवीन 15 दिसंबर को आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद थीं। इसी दौरान मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने उनके हिजाब को हटवाए जाने की घटना हुई। नुसरत का कहना है कि उस समय मंच और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कई लोग हंसने लगे, जिसने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया। एक महिला होने के नाते और अपनी पहचान के साथ खड़े रहने की कोशिश में उन्हें यह बेहद अपमानजनक लगा।

घटना के अगले ही दिन नुसरत ने अपने भाई को फोन कर रोते हुए पूरी आपबीती सुनाई और पटना छोड़कर कोलकाता अपने परिवार के पास चली गईं। उन्हें 20 दिसंबर को बिहार सरकार की नौकरी ज्वॉइन करनी थी, लेकिन मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्होंने नौकरी संभालने से मना कर दिया है।

नुसरत बताती हैं कि उन्होंने स्कूल से लेकर कॉलेज तक हमेशा हिजाब पहनकर पढ़ाई की है। घर, कॉलेज या मॉल हर जगह उन्होंने आत्मविश्वास के साथ हिजाब में रहकर जीवन जिया, लेकिन कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने यह जानबूझकर किया या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन कार्यक्रम में मौजूद लोगों की हंसी ने उन्हें गहरी ठेस पहुंचाई।

उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने समाज के तानों और दबाव की परवाह किए बिना उन्हें पढ़ाया-लिखाया, ताकि वह एक दिन आत्मनिर्भर बन सकें और परिवार का सहारा बनें। सालों की मेहनत और संघर्ष के बाद मिली सरकारी नौकरी उनके लिए गर्व की बात थी, लेकिन इस एक घटना ने उनका आत्मविश्वास तोड़ दिया है।

परिवार लगातार नुसरत को समझाने की कोशिश कर रहा है कि गलती उनकी नहीं थी और उन्हें अपनी मेहनत से मिली नौकरी नहीं छोड़नी चाहिए। परिवार चाहता है कि वह इस सदमे से बाहर निकलें और पटना लौटकर अपना करियर शुरू करें। हालांकि, नुसरत का कहना है कि वह अभी मानसिक रूप से इसके लिए तैयार नहीं हैं। उस दिन की याद आते ही वह सहम जाती हैं और अंदर से टूट जाती हैं।

फिलहाल नुसरत कोलकाता में अपने परिवार के साथ हैं और खुद को संभालने की कोशिश कर रही हैं। यह घटना न सिर्फ एक होनहार डॉक्टर के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं की गरिमा और सम्मान को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ रही है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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