पटना: पटना में गर्ल्स हॉस्टल की एक नीट अभ्यर्थी की मौत को लेकर किए गए सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व IPS अमिताभ दास को गिरफ्तार कर लिया है। इस संबंध में चित्रगुप्त नगर थाना में केस नंबर 44/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने उनके खिलाफ पोक्सो एक्ट समेत अन्य धाराएं लगाई हैं।
नाबालिग की निजता भंग करने का आरोप
पुलिस के अनुसार दास ने जहानाबाद की एक नाबालिग छात्रा से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और ऐसी सामग्री साझा की जिससे उसकी पहचान और निजता प्रभावित हुई। साथ ही उन पर भ्रामक और भड़काऊ दावे पोस्ट करने का भी आरोप है। अधिकारियों का कहना है कि यह सामग्री जांच को प्रभावित करने और जनमानस में अविश्वास पैदा करने की कोशिश थी।
घर पर छापेमारी, तबीयत बिगड़ी
शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित पटना स्काइज अपार्टमेंट में उनके आवास पहुंचे। तीन थानों की संयुक्त टीम ने वहां तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान दास की तबीयत कुछ समय के लिए बिगड़ गई, जिसके बाद मेडिकल टीम को बुलाया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें नियमित चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।
कई हफ्तों से चल रहा विवाद
बताया जा रहा है कि पिछले कई हफ्तों से दास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर छात्रा की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे थे। शुरुआती तौर पर मामले को संदिग्ध आत्महत्या बताया गया था, लेकिन बाद में इस पर व्यापक जनचर्चा और राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई।
पुलिस का कहना है कि उनके पोस्ट पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी और उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बेबुनियाद और उकसाने वाले बयान दिए।
पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद अमिताभ दास ने मीडिया के सामने कहा, ‘निशांत कुमार को बचाने के लिए मुझे गिरफ्तार किया जा रहा है। मेरे पास सबूत है. सीबीआई को दूंगा। अभी मेरी हत्या की कोशिश की गई है। घर से मेरे कुछ सामान इन लोगों ने रख लिए हैं। लगातार इन्हें फोन पर निर्देश आ रहा था कि निशांत कुमार को बचाना है, अमिताभ दास को गिरफ्तार करो। बता दें कि अमिताभ दास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत का जिक्र कर रहे थे।
डीएनए टेस्ट की मांग से बढ़ा विवाद
दास के सबसे विवादित बयानों में मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार का डीएनए टेस्ट कराने की सार्वजनिक मांग शामिल रही। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्यमंत्री आवास आने-जाने वाले लोगों के सैंपल की जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही उन्होंने यह आशंका भी जताई थी कि देरी होने पर उच्च पदस्थ अधिकारी जांच को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि पुलिस का दावा है कि शुरुआती जांच में उनके आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं मिला है। अधिकारियों के मुताबिक यह बयान जांच की दिशा मोड़ने और अफवाह फैलाने की श्रेणी में आते हैं।
यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब पूरा मामला पहले से ही विरोध-प्रदर्शनों, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और अलग-अलग दावों के कारण चर्चा में है। नाबालिग से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों की कानूनी सीमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक दायित्व के बीच की रेखा को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
फिलहाल पुलिस आगे की जांच में जुटी है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।














