रांची: झारखंड में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में आयोग ने प्रत्याशियों की योग्यता और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अहम दिशा-निर्देश सभी जिलों को जारी कर दिए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान दो से अधिक संतान वाले अभ्यर्थियों को लेकर है।
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार, जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक बच्चे हैं और जिनकी अंतिम संतान का जन्म 9 फरवरी 2013 के बाद हुआ है, वे नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह नियम महापौर, नगर परिषद अध्यक्ष और वार्ड सदस्य सहित सभी पदों पर लागू होगा।
इतना ही नहीं, चुनाव नामांकन के समय प्रत्येक प्रत्याशी को एक शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक उनकी संतान संख्या दो से अधिक नहीं है। शपथ पत्र में गलत जानकारी देने की स्थिति में प्रत्याशी की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है और कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
आरक्षण प्रक्रिया पूरी, जिलों से मिल रही रिपोर्ट
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर निकायों के सभी वार्डों में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस संबंध में सभी जिलों से रिपोर्ट प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए जल्द ही सभी जिलों के उपायुक्त (डीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जाएगी, ताकि अद्यतन स्थिति की जानकारी ली जा सके।
वार्ड आरक्षण के कारण परेशान होने की जरूरत नहीं
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि वार्ड आरक्षण के कारण कोई इच्छुक प्रत्याशी अपने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पा रहा है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा प्रत्याशी नगर निकाय के किसी अन्य वार्ड से चुनाव लड़ सकता है, बशर्ते वह उस वार्ड में लागू आरक्षण नियमों का पालन करता हो।
हाल ही में वार्डों के आरक्षण निर्धारण के बाद इस विषय को लेकर कई शिकायतें आयोग को मिली थीं। इसके बाद आयोग ने सभी जिलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर स्थिति को साफ कर दिया है।
मतदाता होना अनिवार्य, किसी भी वार्ड से लड़ सकते हैं चुनाव
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, महापौर, अध्यक्ष और वार्ड सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी का संबंधित नगर निकाय का मतदाता होना अनिवार्य है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति का नाम नगर निकाय की मतदाता सूची में दर्ज है, तो वह उस निकाय के किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ सकता है, लेकिन उसे संबंधित वार्ड के आरक्षण नियमों का पालन करना होगा।
फरवरी में हो सकते हैं नगर निकाय चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग ने संकेत दिए हैं कि सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि फरवरी महीने में नगर निकाय चुनाव कराए जा सकें। प्रशासनिक स्तर पर चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
नगर निकाय चुनाव को लेकर जारी दिशा-निर्देशों से यह साफ है कि आयोग इस बार नियमों के सख्त अनुपालन के साथ चुनाव कराने के मूड में है।














