गढ़वा: जिला मुख्यालय स्थित दिव्य कमल हॉस्पिटल को सील किए जाने के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई और उसके बाद पूर्व मंत्री द्वारा कथित तौर पर ताला खुलवाए जाने के मामले ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। स्थानीय विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने इसे कानून के साथ खिलवाड़ बताते हुए पूर्व मंत्री पर तीखा हमला बोला है।
क्या है पूरा मामला?
सदर एसडीओ संजय कुमार ने अनियमितताओं और आवश्यक दस्तावेजों की कमी के आधार पर दिव्य कमल हॉस्पिटल को सील करने का आदेश जारी किया था। प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हुए अस्पताल परिसर में ताला लगा दिया गया था।
विवाद तब शुरू हुआ जब गुरुवार को पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी करते हुए अस्पताल का ताला खुलवा दिया और उसे दोबारा चालू करा दिया।
विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी की तीखी प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम के बाद विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने प्रेस से बातचीत करते हुए जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून के अनुसार कदम उठाया जाना चाहिए।
उनकी प्रमुख मांगें और आरोप इस प्रकार हैं
निष्पक्ष कार्रवाई की मांग: विधायक ने जिले के उपायुक्त (DC) से पूर्व मंत्री के खिलाफ तुरंत केस दर्ज करने की मांग की, ताकि जनता के बीच प्रशासन की निष्पक्षता का संदेश जाए।
प्रशासनिक प्रक्रिया में दखल का आरोप: उन्होंने कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया से ऊपर नहीं है। यदि जांच के बाद कार्रवाई हुई है तो उसमें हस्तक्षेप अधिकारियों के मनोबल को कमजोर करता है।
गुंडागर्दी का आरोप: तिवारी ने पूर्व मंत्री पर सीधे तौर पर गुंडागर्दी करने और गलत लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा, “कानून सबके लिए बराबर है। राजनीतिक प्रभाव के आधार पर नियमों को ताक पर रखने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। डीसी को तुरंत कार्रवाई कर यह साबित करना चाहिए कि जिला प्रशासन किसी दबाव में नहीं है।”
प्रशासन की चुप्पी, बढ़ा सियासी तनाव
फिलहाल जिला प्रशासन इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है और सावधानी से कदम बढ़ा रहा है। एक तरफ विधायक ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है, तो दूसरी ओर पूर्व मंत्री के समर्थकों का कहना है कि अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई गलत तरीके से की गई थी।
अब सबकी नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वह इस मामले में पूर्व मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करता है या फिर यह विवाद सियासी खींचतान में उलझकर रह जाता है।













