Dollar Vs Rupee: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर 93.37 पर पहुंच गया है। इससे पहले गुरुवार को रुपया 92.63 पर बंद हुआ था। इस साल की शुरुआत से ही रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है और इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां और घरेलू आर्थिक कारक मिलकर रुपये को कमजोर बना रहे हैं।
रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। हालांकि बाद में इसमें हल्की गिरावट आई, लेकिन कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, ऐसे में महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर डॉलर की मांग बढ़ाता है और रुपये को कमजोर करता है।
रुपये पर दबाव बढ़ने की एक और बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। मार्च महीने में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम निकाल ली है। यह जनवरी 2025 के बाद से किसी एक महीने में हुई सबसे बड़ी निकासी है। जिसका सीधा असर रुपये की कीमत पर पड़ा।
रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। रसोई गैस महंगी हो सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान की कीमतों में उछाल आ सकता है।














