रांची: झारखंड की राजनीति एक बार फिर सरगर्म है। सियासी गलियारों में यह चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जल्द ही कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा के साथ नई राजनीतिक व्यवस्था खड़ी कर सकता है। हालांकि, JMM ने इन अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है, फिर भी कांग्रेस खेमे में हलचल बनी हुई है।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नाराजगी फूटी
विधानसभा सत्र की तैयारी को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में गुरुवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश प्रभारी के राजू, सह प्रभारी डॉ. सिरिवेला प्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, नेता विधायक दल प्रदीप यादव और उपनेता राजेश कच्छप मौजूद रहे।
इस बैठक में कई विधायकों ने खुलकर नाराजगी जताई। सूत्रों के मुताबिक, विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जाती। यहां तक कि कांग्रेस कोटे के मंत्रियों पर भी यह आरोप लगे कि वे अपने ही विधायकों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते।
बैठक में आगामी विधानसभा सत्र की रणनीति पर चर्चा की गई। विधायकों को क्षेत्रीय मुद्दे उठाने और सरकार के पक्ष में प्रभावी ढंग से तर्क रखने को कहा गया। हालांकि, माहौल में खिंचाव साफ दिख रहा था।
कांग्रेस अध्यक्ष ने विवाद की बातों को किया खारिज
बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने विवाद की बातों पर रोक लगाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बैठक में केवल सामान्य विषयों पर चर्चा हुई और विधायकों को जनता से जुड़े मुद्दे सत्र में मजबूती से उठाने का निर्देश दिया गया है।
JMM–भाजपा गठबंधन की अटकलों पर पार्टी का बयान
दूसरी ओर, तेजी से फैल रही राजनीतिक कयासबाज़ी को JMM नेताओं ने सिरे से नकार दिया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, कुछ नेताओं ने यह जरूर स्वीकारा कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन द्वारा किए गए व्यवहार की टीस अभी भी बनी हुई है, जिसने चर्चा को और हवा दे दी है।
राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा
कांग्रेस विधायकों की नाराज़गी, महागठबंधन के भीतर की खटास और JMM पर लग रहे आरोप, इन सबके बीच झारखंड की राजनीति गर्म होती जा रही है। विधानसभा सत्र नज़दीक है, ऐसे में गठबंधन में जारी तनाव आने वाले दिनों में और खुलकर सामने आ सकता है।
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