सिल्ली:- सिल्ली,मूरी आसपास के क्षेत्र में बंगाली समुदाय का पारंपरिक पर्व बासी भात शनिवार के दिन धूमधाम से मनाया गया। सरस्वती पूजा के दूसरे दिन मनाया जानेवाला यह पर्व माँ षष्ठी की पूजा अर्चना के साथ शुरू हुआ। इस दिन सभी घरों में नौ प्रकार के सब्ज़ी, मछली और भात बनाया जाता है, जिसे बासी फ़ुल बासी पानी से माँ षष्ठी का पूजा कर भोग लगाया जाता है।
बासी भात के दिन सभी अपने जान पहचान और रिश्तेदारों को खाने के लिए बुलाते हैं। दिन भर लोगों का एक दूसरे के घर आना जाना लगा रहता है। इस अवसर पर बंगाली समुदाय के लोग अपने पारंपरिक वेशभूषा में सजते हैं और एक दूसरे के साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं।
बासी भात का यह पर्व बंगाली समुदाय के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पर्व उनकी संस्कृति और परंपरा का एक हिस्सा है। इस दिन लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशियाँ मनाते हैं और माँ षष्ठी का आशीर्वाद लेते हैं।
बासी भात के इस पर्व को मनाने के लिए लोगों ने बहुत ही उत्साह दिखाया। लोगों ने अपने घरों को सजाया और बासी भात का आयोजन किया। इस अवसर पर लोगों ने अपने पारंपरिक व्यंजन बनाए और अपने प्रियजनों के साथ मिलकर इस पर्व को मनाया।
सिल्ली-मूरी क्षेत्र में बासी भात का यह पर्व बहुत ही सफल रहा। लोगों ने इस पर्व को बहुत ही उत्साह और आनंद के साथ मनाया। इस अवसर पर लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी और माँ षष्ठी के आशीर्वाद की कामना की।










