टाटानगर स्टेशन के बाहर धरना, बृहद जन आंदोलन की धमकी
जमशेदपुर: चक्रधरपुर रेल मंडल में कई ट्रेनें कथित रूप से सही समय में घुस जाती है इसके बावजूद चांडिल कॉन्ड्रा और राखा माइंस जैसे स्टेशनों पर पहुंचने के बाद ट्रेनों की गति और स्टॉपेज बदतर हो जाती है जिसके कारण यात्रियों को भारी परेशानी होती है आधा घंटा से 20 मिनट जिस ट्रेन को टाटानगर पहुंचने में समय लगता है उसे वहां पहुंचने में तकरीबन तीन से 5 घंटा लेट हो जाती है। इसके खिलाफ जल यू विधायक सरयू राय समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है। इसी के तहत टाटानगर स्टेशन पर मंगलवार को धरना दिया गया। इस दौरान विधायक ने चेतावनी दी कि यदि इसमें सुधार नहीं हुआ तो वृहद जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस मौके पर जद यू विधायक सरयू राय ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सिर्फ एक ही मांग है कि टाटानगर आने वाली ट्रेनों को समय पर चलाया जाए।उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे रेल मंत्री से भी वह मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि चक्रधरपुर से टाटानगर की दूरी तय करने में जहां सामान्यतः कम समय लगना चाहिए, वहीं वर्तमान में ट्रेनों को 5 से 6 घंटे तक लग रहे हैं।
विधायक ने कहा कि चांडिल कॉन्ड्रा और राखा माइंस जैसे स्टेशनों तक ट्रेनें समय पर पहुंचती हैं, लेकिन जमशेदपुर आते-आते 3 से 4 घंटे की देरी हो जाती है। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, इसका स्पष्ट जवाब रेलवे अधिकारियों के पास नहीं है।
उन्होंने चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया के बयान का जिक्र करते हुए बताया कि प्लेटफॉर्म की कमी और मालगाड़ियों के लिए अलग लूप लाइन नहीं होने को देरी का कारण बताया गया है। हालांकि, उन्होंने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे बुनियादी काम वर्षों पहले पूरे हो जाने चाहिए थे।
सरयू राय ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार यात्री ट्रेनों को सुदूर इलाकों में रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी होती है।
उन्होंने कहा कि कई ट्रेनों में पैंट्री कार तक नहीं होती, जिससे बच्चों और यात्रियों को भूखे रहना पड़ता है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि रेल अधिकारियों की संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है।
विधायक ने बताया कि ट्रेनों की देरी का असर मजदूरों पर भी पड़ रहा है। देर से पहुंचने के कारण उनकी हाजिरी कट जाती है, जिससे अब वे जमशेदपुर आने से कतराने लगे हैं। इसके अलावा टेंपो चालकों और अन्य वर्गों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने रेलवे प्रशासन से सवाल किया कि आखिर प्राथमिकता किसे दी जानी चाहिए-यात्री ट्रेनों को या मालगाड़ियों को। उन्होंने मांग की कि यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
धरने के दौरान विधायक ने कहा कि यह आंदोलन उनके व्यक्तिगत विवेक से शुरू किया गया है और इसमें सभी राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो एक समिति बनाकर ट्रेनों की देरी की समीक्षा कराई जाएगी और रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वे दिल्ली जाकर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और रेल मंत्री से मुलाकात करेंगे और जमीनी हकीकत से अवगत कराएंगे। साथ ही, बड़ी-बड़ी घोषणाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करने का भी काम करेंगे।










