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पंपापुर इंटर महाविद्यालय के प्राचार्य व प्रबंधन समिति पर शिक्षकों ने अनुदान राशि का गबन करने के लगाया आरोप

On: December 22, 2024 11:54 AM
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पालकोट (गुमला): प्राचार्य मनोज कुमार जायसवाल महाविद्यालय सचिव और शिक्षक प्रतिनिधि चुनीलाल भगत पर पूर्व में अस्थायी मानदेय शिक्षक आभाष बड़ाइक, अजय बड़ाइक, पोलिना एभा कुजूर के द्वारा आरोप लगाया गया है। प्राचार्य ने कहा कि यह सरासर बे-बुनियाद और झूठा है।

मामले को लेकर प्राचार्य मनोज कुमार जायसवाल ने बताया कि जहां तक पूर्व में कार्यरत शिक्षक आभास बड़ाइक अजय बढ़ाइक  सारिका कुमारी द्वारा जो महाविद्यालय में अनुभव प्रमाण पत्र के लिए महाविद्यालय में कक्षाएं ले रहे थे। इस बीच 2020 में कोरोना महामारी के कारण महाविद्यालय बंद हो गया तत्पश्चात यह शिक्षक महाविद्यालय छोड़ चुके थे। फिर ये लोग उसी समय जो शिक्षण कार्य किए थे उनका मानदेय भी महाविद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा भुगतान कर दिया गया है। इनका कोई बकाया राशि नहीं है। इनके द्वारा यह भी आरोप लगाया गया है कि ये स्थाई शिक्षक होने हेतु डेढ़ लाख रुपया देने का जो दावा किया जा रहा है। वह सरासर गलत है। प्राचार्य महोदय एवं महाविद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा पूछे जाने पर बताया गया कि यह सिर्फ और सिर्फ अपने नौकरी पाने और स्वार्थ बस हम लोगों पर झूठा आरोप लगा रहे हैं । हमें ना कोई राशि की जानकारी है। ना हमने किसी के हाथों से कोई राशि लिया है रही बात की महाविद्यालय को संचालित करने हेतु मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा अनुदान की राशि प्राप्त होती है । वित्तीय वर्ष 2023 ,24 में अस्थाई शिक्षक के रूप में उनका नाम परिषद कार्यालय को भेजा गया था और शिक्षकों की कमी होने के कारण अस्थाई शिक्षक आभास बड़ाइक को बीआरसी कार्यालय कार्य देखने हेतु महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा उन्हें अस्थाई कोऑर्डिनेटर के रूप में प्रभार दिया गया जो बीआरसी पालकोट और महाविद्यालय से संबंधित कार्यों को देखते थे उनके द्वारा udise कोड अस्थाई को ऑर्डिनेटर को दिया गया वह महाविद्यालय के प्राचार्य को अंधेरे में रखकर स्वयं और अन्य शिक्षकों के स्वार्थ हेतु और अस्थाई शिक्षक भविष्य में स्थाई होने का दावा करने हेतु नियमित रूप में होने के लिए जैक द्वारा ऑप्शन दिया जाता है अस्थाई ,स्थाई शिक्षकों में उसमें ऑप्शन में टीक करने का रहता है। जिसमे आभाष बड़ाइक अपने  मन से स्थाई शिक्षक वाला ऑप्शन में टीक करवा दिया और इसका कॉपी बीआरसी सहित जैक को भी भेज दिया गया इनका शिक्षण कार्य का पूरा मानदेय महाविद्यालय प्रबंधन  समिति द्वारा मानदेय भुगतान कर दिया गया है वर्ष 2024 में शिक्षको  की कमी को देखते हुए सासी निकाय के बैठक उपरांत विद्यालय महाविद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा निर्णय लिया गया कि महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी है। और इस कमी को पूरा करने के लिए रिक्तियां वैकेंसी निकल कर स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति करने हेतु विज्ञापन समाचार पत्र के माध्यम से प्रभात खबर समाचार पत्र के द्वारा दिनांक 24 6.2024 को वैकेंसी निकाली गई उसके उपरांत यह अस्थाई शिक्षकों के द्वारा भी आवेदन जमा किया गया और साक्षात्कार में भी शामिल हुए तो यह अपने आप को कैसे नियमित शिक्षक मानते हैं ।दूसरी बात प्राचार्य महोदय और महाविद्यालय प्रबंधन समिति को पूछे जाने पर यह बताया कि इन्हें किसी तरह का कोई महाविद्यालय के द्वारा कोई पत्र उनके हाथों में नहीं दिया गया है क्योंकि स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। महाविद्यालय प्रबंधन में प्राचार्य महोदय और शिक्षक प्रतिनिधि एक पदेन सदस्य होते हैं। और इनका स्थाई करने की क्षमता नहीं है इसमें सिर्फ महाविद्यालय प्रबंधन समिति और विषय विशेषज्ञ सब्जेक्ट एक्सपर्ट द्वारा ही चुने गए शिक्षकों की स्थाई नियुक्ति होती है।  वित्तीय वर्ष 2023- 24 में अनुदान की राशि का वितरण सासी निकाय की बैठक द्वारा निर्णय लिया जाता है। जिसमें प्रावधान के अनुसार स्थाई शिक्षकों को वेतन देने का अधिकार होता है ।तो यह अस्थाई और मानदेय  शिक्षक होने के नाते आभाष बड़ाइक अजय बड़ाई ,पॉलीइना विभाग कुजूर सारिका कुमारी एवं अन्य शिक्षको  के द्वारा अनुदान राशि को प्राप्त करने का अधिकारी नहीं होते हैं जिस कारण इन्हें अनुदान की राशि नहीं दी गई और यह जो राशि प्राप्त नहीं होने का आरोप लगाए हैं। यह सरासर बेगुन याद है चुकी प्रावधान के अनुसार स्थाई शिक्षकों को ही देना था जिस कारण इन्हें राशि नहीं दी गई। लेकिन इन्होंने राशि सहित यह अपना पक्का नौकरी पाने हेतु जबरदस्ती झूठा आरोप प्राचार्य सहित प्रबंधन समिति पर लगाकर यह सरकार के नियमों का उल्लंघन कर जबरदस्ती अनुदान की राशि प्राप्त करना चाहते थे। जिसपर महाविद्यालय प्रबंधन समिति को  अस्थाई शिक्षको को अनुदान राशि देने का प्रावधान नही है ,जिस कारण इन्होंने अपने मिली भगत कर बी आर सी(BRC )पालकोट के कार्य करता डमरू धर साहू एरिया co-ordinator से मिली भगत से महाविद्यालय के जरूरी कागजात को प्राचार्य के बिना अनुमति के गोपनीय पेपर दे दिया गया और इन्होंने न्यायालय में जा करके उनके ऊपर झूठा आरोप लगाया है कि स्थाई होने हेतु एक लाख पचास हजार देने का आरोप लगा रहे है। यह सरासर बेबुनियाद है। गलत है। प्राचार्य एवं शिक्षक प्रतिनिधि एवम महाविद्यालय प्रबंधन समिति के द्वारा प्राप्त  जानकारी के अनुसार यह ना तो किसी राशि को प्राप्त किए हैं। और ना ही कोई राशि के बारे में विद्यालय महाविद्यालय प्रबंधन समिति को इसकी जानकारी  नही है। अर्थात यह सरासर गलत है। बेबुनियाद है झूठ है इसका जो है प्राचार्य महोदय और महाविद्यालय प्रबंधन समिति खंडित करते हैं।

बीआरसी कॉर्डिनेटर मरूधर साहू का बयान

बीआरसी कॉर्डिनेटर मरूधर साहू न कहा कि हमें महाविद्यालय में  शिक्षक की नियुक्ति के विषय में कोई जानकारी नही है, रही बात की स्थाई और अस्थाई इसके बारे में भी हमे नही पता हम किसी को कोई मदद नही किए है रही बात की इन सारी जानकारी को महाविद्यालय में जिनको जिम्मेदारी मिलता है उसे करना होता है इस लिए ये महाविद्यालय के अस्थाई शिक्षको के ही शिक्षक के द्वारा u dise code मे छेड़छाड़ किया गया है और अनियमित को नियमित किया गया है। ये सरासर प्राचार्य के साथ धोखा है। चूंकि प्राचार्य के बिना अनुमति के बिना ऐसा नही करना चाहिए था। डमरू धर साहू पर प्राचार्य और प्रबंध समिती पर अपनी साली कंचन कुमारी साहू को नियुक्ति करवाने हेतु लगातार प्राचार्य पर दबाव बनाया जा रहा था। इस बात को पूछने पर डमरू धर साहू बोले की कंचन हमारी साली है। किन्तु इनको प्रबन्धन समिती रखे या ना रखे हमे कोई लेना देना नहीं है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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