रांची: रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र अंतर्गत मल्हारकोचा बस्ती से अपहृत पांच वर्षीय अंश कुमार और चार वर्षीय अंशिका की सकुशल बरामदगी के बाद अपहरण की जो परत-दर-परत कहानी सामने आई है, उसने न सिर्फ एक अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, बल्कि रांची पुलिस और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) की सतर्कता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, अपहरण के बाद दोनों मासूम बच्चे पूरे पांच दिनों तक रांची में ही रहे, इसके बावजूद पुलिस या आरपीएफ को उनकी कोई भनक नहीं लगी। इस दौरान अपहर्ता दंपती बच्चों को लेकर शालीमार बाजार और फिर हटिया रेलवे स्टेशन तक पहुंच गया। यहां से वे ट्रेन के जरिए बच्चों को रामगढ़ रेलवे स्टेशन ले गए और वहां से ऑटो से रजरप्पा थाना क्षेत्र के चितरपुर स्थित जान्हे रहमतनगर पहुंच गए।
इस मामले में गिरफ्तार अपहर्ता दंपती की पहचान बिहार के औरंगाबाद जिले के बारून थाना क्षेत्र निवासी नव खेरवार उर्फ सूर्या और रामगढ़ के कोठार गांव की रहने वाली सोनी खेरवार के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों ने अपने ठिकानों और नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग दिए हैं। इनके बयानों के सत्यापन के बाद पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और इस प्रकरण में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी दंपती मल्हारकोचा बस्ती में बंजारा बनकर बैलून बेच रहा था। इसी दौरान उनकी नजर अंश और अंशिका पर पड़ी। दोनों को बैलून और चॉकलेट का लालच देकर वे बच्चों को अपने साथ शालीमार बाजार स्थित ठिकाने पर ले गए। यहां बच्चों को दो दिनों तक रखा गया। इस दौरान आरोपी आसपास की गतिविधियों पर नजर रखते रहे। जब उन्हें लगा कि पुलिस की तलाश तेज हो रही है, तो वे बच्चों को लेकर हटिया रेलवे स्टेशन पहुंच गए।
हटिया रेलवे स्टेशन पर भी आरोपी करीब तीन दिनों तक बच्चों के साथ रहे। इस दौरान बच्चों को खाना खिलाया गया और बैलून देकर बहलाया गया, ताकि किसी को शक न हो। सात जनवरी को दोनों आरोपी ट्रेन से बच्चों को लेकर रामगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से रजरप्पा थाना क्षेत्र के चितरपुर चले गए।
चितरपुर में आरोपी दंपती ने रोशन आरा नामक महिला से किराए पर एक कमरा लिया। मकान मालकिन को बताया गया कि दोनों बच्चे उनके ही हैं और ठंड के कारण रहने की जगह नहीं है। बच्चों का व्यवहार सामान्य रहने के कारण मकान मालकिन को किसी तरह का शक नहीं हुआ। उसने बच्चों को ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े भी दिए, जो बरामदगी के समय बच्चों ने पहने हुए थे।
इस पूरे मामले को लेकर सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक ने स्पष्ट किया है कि यह मामला मानव तस्करी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान ऐसे पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, जिनसे यह साबित होता है कि गिरफ्तार आरोपी मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं और उनके संबंध दूसरे राज्यों के तस्करों से भी हैं। आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है कि झारखंड सहित अन्य राज्यों में उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज है या नहीं।
वहीं, डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बताया कि बच्चों का अपहरण करने वाला यह गिरोह अंतरराज्यीय है और झारखंड के बाहर से आकर यहां सक्रिय हुआ था। पुलिस सिर्फ बच्चों की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए गहन जांच जारी है। अब तक की छानबीन में बड़े मानव तस्करी गिरोह की जानकारी मिली है, जिसका सत्यापन किया जा रहा है।
पुलिस का दावा है कि इस अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े सभी सहयोगियों को चिन्हित कर जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
वहीं, इस घटना ने यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इतने दिनों तक बच्चे शहर और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाकों में रहे, फिर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ी।













