नई दिल्ली: भारतीय एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और कुछ चुनिंदा बड़ी एयरलाइनों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने तीन नई एयरलाइंस को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया है। इन एयरलाइंस में शंख एयर, अलहिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस शामिल हैं। सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब हाल के महीनों में प्रमुख एयरलाइन इंडिगो के संचालन से जुड़ी तकनीकी और प्रबंधन संबंधी दिक्कतें सामने आई थीं, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
मौजूदा समय में भारतीय घरेलू विमानन बाजार पर कुछ ही बड़ी कंपनियों का दबदबा है। इंडिगो और एयर इंडिया समूह मिलकर घरेलू हवाई यात्रा बाजार के 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से को नियंत्रित करते हैं। इसमें अकेले इंडिगो की हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत बताई जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक एकाधिकार स्थिति में यदि किसी बड़ी एयरलाइन के संचालन में बाधा आती है, तो उसका सीधा असर यात्रियों, उड़ानों और किरायों पर पड़ता है।
हाल में इंडिगो की उड़ानों में तकनीकी कारणों से देरी और रद्दीकरण की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद यह महसूस किया गया कि सेक्टर में अधिक प्रतिस्पर्धा और विकल्प होना बेहद जरूरी है, ताकि यात्रियों को बेहतर सेवाएं और स्थिर संचालन मिल सके।
सरकार की रणनीति: ज्यादा कंपनियां, ज्यादा विकल्प
सिविल एविएशन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से इन तीनों नई एयरलाइंस को NOC दिए जाने की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति है कि भारतीय एविएशन सेक्टर में नई कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि देश में तेजी से बढ़ रही हवाई यात्रा की मांग को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।
मंत्री के अनुसार, नई एयरलाइंस के आने से न सिर्फ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि किरायों में संतुलन, बेहतर सेवाएं और यात्रियों के लिए ज्यादा विकल्प भी उपलब्ध होंगे।
यूडीएएन योजना को भी मिलेगा बल
सरकार की यह पहल यूडीएएन (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के उद्देश्यों से भी जुड़ी है। इस योजना के तहत क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि छोटे शहरों और कस्बों को भी राष्ट्रीय विमान नेटवर्क से जोड़ा जा सके। नई एयरलाइंस के प्रवेश से क्षेत्रीय रूट्स पर उड़ानों की संख्या बढ़ने और कनेक्टिविटी में सुधार की उम्मीद है।
अब NOC मिलने के बाद इन तीनों एयरलाइंस को DGCA से एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (AOC) सहित अन्य नियामकीय मंजूरियां लेनी होंगी। इसके बाद ही ये कंपनियां व्यावसायिक उड़ानें शुरू कर सकेंगी। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इनके परिचालन शुरू होने से भारतीय एविएशन सेक्टर में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को नई दिशा मिलेगी।












