आपके लेख (Unedited) : दिल्ली दंगों की जड़ें बहुत गहरी हैं। अगर हम सभी को यह…

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दिल्ली दंगों की जड़ें बहुत गहरी हैं। अगर हम सभी को यह लगता है कि प्रधान मंत्री गृह मंत्री क्या कर रहे हैं तो आइये कुछ सूत्र हम बताते हैं कि देश को अस्थिर करने के लिये कांग्रेस किस स्तर पर षड़यन्त्र कर सकती हैं। दिल्ली दंगों की जाँच NIA से हो! यह क्यूँ आवश्यक है?

क्या आपको पता है कि कांग्रेस ने टर्की में पिछले ११ नवम्बर २०१९ को कार्यालय खोला? पूरे विश्व में भारत के विरुद्ध तीन मुस्लिम नेताओं के सुर एक है।पाकिस्तानी इमरान खान, मलेशिया के महातिर मोहम्मद, टर्की का एर्दोगन जिसमें महातिर का त्यागपत्र डोनाल्ड ट्रम्प के भारत में कदम रखते ही हो गया।

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भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार की बात कह कर मुस्लिम देशों से चंदा उगाहने की तैयारी राजमाता की है। यह धन टर्की में सुरक्षित रखा जायेगा। अमेरिकी डेमोक्रेटिक उद्योगपति जार्ज सोरेश जो पूरे विश्व में वामपंथियों को फ़ंडिंग के लिये कुख्यात है उसने अक्टूबर २०१९ में अपने भाषण में कहा कि दुनिया में तीन राष्ट्रवादी शासक हैं जो किसी तानाशाह से कम नही हैं भारत में नरेन्द्र मोदी, अमेरिका में ट्रम्प,चीन में जीनपिंग इन्हें मिटाना होगा।इसके लिये तीन बिलियन डालर का चंदा दिया जिसमें से एक बिलियन डालर भारत में दंगे फैलाने एवं मीडिया घरानों में नेरेटिव गढ़ने में खर्च करना होगा। हम हिंदुओं को आतंकवादी बताना भी उसी षड़यन्त्र का हिस्सा है।

सोनिया द्वारा सड़कों पर उतरने की अपील भी, दिल्ली हाईकोर्ट का जज मुरलीधरन की पत्नी एस.रामनाथन अर्बन नक्सली गौतम नवलखा के NGO में काम करती है। नवलखा के ट्रैंज़िट रिमांड को रोकने से लेकर नाज़ फ़ाउंडेशन के समलैंगिक अपराघ एवम् मनीष तिवारी के सहायक और सोनिया के पर्चा दाख़िला में अधिवक्ता की भूमिका से आप समझिए कि साज़िश कितनी गहरी है।सरकार के प्रवक्ता ने जब इस बात का खुलासा किया कि कैसे कपिल सिब्बल आदि के एकाऊंट में पैसे पहुँचे। मेरे एक मित्र ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत में पैसा भेज कर कैसे प्रदर्शन कराये गये।यह आन्दोलन नही है भारत और भारतीयता को नष्ट करने का षड़यन्त्र है।जब दिल्ली जल रही है तो यह पूछना बनता है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवाबजादे साहब किस वार-रूम में बैठे हैं? यह राष्ट्रीय एकता और अखण्डता का प्रश्न है अतः NIA से जाँच आवश्यक है।

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जहाँ तक धन का प्रश्न है यह पूरी तरह प्रायोजित है। चाहे हर्ष मंदर हो कोलिन गुंजाविल्स ये सभी मानवाधिकार के आड़ में देश-द्रोही को संरक्षण देते हैं।

दिल्ली दंगा पूरी तरह प्रायोजित है।अभी गिरफ़्तारियाँ हो रही हैं।पूछ-ताछ में राज खुलेंगे। शाहीन बाग़ के बहाने मौलानाओं का कथन कि देश को अस्थिर करने से निवेशक नही आयेंगे तो भारत बर्बाद हो जायेगा इस लिये तिरंगे और संबिधान के आड़ में धरना चालू रखो।

न मोदी मूर्ख है न अमित शाह और न डोवाल एक बेहद थकान वाला रास्ता, धरना पर धन खर्च उनका, दंगाई और उनके आका की पहचान कर ली जायेगी।

चलो! दिल्ली बच गयी और सोनिया की तिलमिलाहट CWC की बैठक, राष्ट्रपति भवन पर कांग्रेसी मार्च और पुनश्च टर्की आफिस देश के विरुद्ध षड़यंत्रों की कहानी बयाँ कर देते हैं।
इसमें FUNDING PATTERN ED देखे।। राजनीतिक दलों की PFI से संबधो की जाँच CBI करे।

अनुरंजन अशोक
प्रदेश अध्यक्ष
मिशन मोदी अगेन पीएम
झारखण्ड प्रदेश