Switzerland Gold Reserve: पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों ने जिस तरह रफ्तार पकड़ी है, उसने निवेशकों से लेकर वैश्विक वित्तीय संस्थानों तक को चौंका दिया है। हालात ऐसे हैं कि अब सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि आर्थिक अस्थिरता के खिलाफ़ एक सुरक्षा कवच बनता जा रहा है। हर किसी के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है, आखिर सोने की कीमतें जाकर कहां रुकेंगी।
अब तक माना जा रहा था कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा रिकॉर्ड स्तर पर की जा रही खरीदारी ही सोने की कीमतों में उछाल की सबसे बड़ी वजह है। लेकिन अब इस कहानी में एक ऐसा मोड़ सामने आया है, जिसके बारे में शायद ही किसी ने कल्पना की हो।
शीत युद्ध का परमाणु बंकर और सोने का रहस्य
स्विट्जरलैंड में शीत युद्ध के दौर में बनाए गए करीब 3 लाख 70 हजार परमाणु बंकर मौजूद हैं। इनमें से ज्यादातर अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इन्हीं में से एक बंकर आज वैश्विक गोल्ड मार्केट का सबसे रहस्यमय केंद्र बन गया है। इस हाई-सिक्योरिटी बंकर में हर हफ्ते एक से दो टन सोना पहुंचाया जा रहा है। इस भंडार का नियंत्रण किसी सरकार या बैंक के पास नहीं, बल्कि क्रिप्टो दिग्गज टेथर होल्डिंग्स SA के हाथों में है। बैंकों और सरकारों को छोड़ दिया जाए, तो इसे दुनिया का सबसे बड़ा निजी स्वर्ण भंडार माना जा रहा है।
सोने की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था
टेथर ने सुरक्षा कारणों से अपने सोने को इस पुराने परमाणु बंकर में रखा है। मोटी स्टील की दीवारें, कई स्तरों की सुरक्षा और लगभग अभेद्य ढांचा, यह बंकर किसी जासूसी फिल्म का सीन लगता है।
कंपनी के सीईओ पाओलो अर्दोइनो खुद मजाकिया अंदा में इसे
जेम्स बॉन्ड जैसी जगह बता चुके हैं।
दुनिया भर में सरकारें बढ़ते कर्ज़ और खर्चों से जूझ रही हैं।
घाटे को पूरा करने के लिए नोट छापे जा रहे हैं, जिससे आम निवेशकों के मन में डर गहराता जा रहा है कि इससे महंगाई बढ़ेगी, मुद्रा की क्रय शक्ति घटेगी और बचत का मूल्य खत्म हो जाएगा। यही सोच अब सिर्फ़ पारंपरिक निवेशकों तक सीमित नहीं रही।
क्रिप्टो निवेशकों में भी बैंकिंग और सरकारी व्यवस्था को लेकर अविश्वास तेज़ी से बढ़ा है। इसी वजह से पूंजी उन संपत्तियों की ओर भाग रही है जो सरकारी नीतियों से कम प्रभावित हों और लंबे समय तक मूल्य बनाए रखें और यही वजह है कि सोना फिर से सबसे सुरक्षित ठिकाना बन गया है।
रिकॉर्ड तोड़ कीमतें और टेथर का रोल
जैसे ही निवेशकों ने बड़े पैमाने पर सोना खरीदना शुरू किया, इसकी मांग आसमान छूने लगी। परिणामस्वरूप सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंच गईं। वैश्विक बाजार में पहली बार सोना 5,200 डॉलर प्रति औंस के पार जाता दिखा। जो सुरक्षित निवेश की भूख में अभूतपूर्व बढ़ोतरी का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टेथर जैसी कंपनियों की टन के हिसाब से खरीदारी ने इस तेजी को और हवा दी।
जब कोई निजी संस्था लगातार भारी मात्रा में सोना खरीदती है, तो बाज़ार में उपलब्ध सप्लाई घटती है और कीमतें अपने आप ऊपर जाती हैं।
ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में टेथर के सीईओ पाओलो अर्दोइनो ने अपनी कंपनी की तुलना सीधे-सीधे एक केंद्रीय बैंक से कर दी।
उन्होंने कहा कि, भविष्य में अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देश डॉलर के मुकाबले सोने से समर्थित नई मुद्रा पेश कर सकते हैं। अर्दोइनो के मुताबिक, टेथर अपने भारी मुनाफे को लगातार सोने में निवेश करता रहेगा और अब कंपनी बैंकों की तरह धातु व्यापार में भी उतर चुकी है। उन्होंने कहा, हम जल्द ही दुनिया के सबसे बड़े, संभवतः सोने के केंद्रीय बैंक बनने जा रहे हैं।
70 टन खरीद, 140 टन का भंडार
ब्लूमबर्ग के अनुमानों के अनुसार, टेथर ने पिछले साल 70 टन से अधिक सोना खरीदा। यह मात्रा अधिकांश केंद्रीय बैंकों से भी ज़्यादा है। केवल पोलैंड ने इससे अधिक, लगभग 102 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। पाओलो अर्दोइनो के मुताबिक, टेथर के पास इस समय करीब 140 टन सोना है। जिसमें कंपनी का निजी भंडार और उसके गोल्ड-समर्थित टोकन शामिल हैं। इस सोने की अनुमानित कीमत करीब 24 अरब डॉलर बताई जा रही है।
USDT से सोने तक का सफर
टेथर की कमाई का सबसे बड़ा ज़रिया उसका डॉलर-समर्थित स्टेबलकॉइन USDT है, जिसकी बाज़ार आपूर्ति लगभग 186 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। लोग असली डॉलर देकर USDT खरीदते हैं, और कंपनी उस रकम को अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड
और भारी मात्रा में सोने में निवेश कर देती है। यही निवेश टेथर को ब्याज और ट्रेडिंग के ज़रिये अरबों डॉलर का मुनाफा देता है।
गोपनीय बाजार और असली खरीददार
वैश्विक गोल्ड मार्केट बेहद गोपनीय माना जाता है। कई बार असली खरीददारों की पहचान सामने ही नहीं आती। उदाहरण के तौर पर, चीन ने आधिकारिक तौर पर केवल 27 टन सोना खरीदने की जानकारी दी। जबकि व्यापारियों का मानना है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज़्यादा था। ऐसे माहौल में टेथर की खुलकर घोषित की गई खरीदारी ने बाज़ार का ध्यान खींचा है।
सोने की कीमतों में उछाल का बड़ा कारण?
जेफरीज फाइनेंशियल ग्रुप के विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक साल में सोने की कीमत में आई लगभग 65% तेजी में टेथर की खरीदारी की अहम भूमिका हो सकती है। विशेषज्ञों ने टेथर को
एक नया, शक्तिशाली और दीर्घकालिक खरीदार बताते हुए कहा कि इसकी मौजूदगी से सोने की मांग आने वाले समय में भी मजबूत बनी रह सकती है।












