नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े एक संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए बसंत पंचमी के अवसर पर पूजा और नमाज की अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा कर सकेगा, जबकि मुस्लिम पक्ष दिन में दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच नमाज अदा करेगा। कोर्ट ने प्रशासन को परिसर में बैरिकेडिंग करने का भी निर्देश दिया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि भोजशाला परिसर में दोनों समुदायों के लिए आने-जाने के रास्ते अलग-अलग रहेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो। साथ ही, दोनों पक्षों से शांति, संयम और आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हुए प्रशासन एवं पुलिस का पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
ASI का आदेश बरकरार, मेरिट पर टिप्पणी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को जारी रखा है। उल्लेखनीय है कि ASI के इसी आदेश के तहत भोजशाला परिसर में मंगलवार और वसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी गई थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाती रही है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने इस मामले के मेरिट (मूल विवाद) पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
पूजा और नमाज के लिए तय समय
कोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर में एक तरफ हवन कुंड रहेगा, जहां हिंदू पक्ष वसंत पंचमी की पूजा करेगा, जबकि दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष निर्धारित समय पर नमाज अदा करेगा। नमाज का समय दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक तय किया गया है, जबकि पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक की जा सकेगी।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु जैन ने दलील दी कि ASI का आदेश ही विवाद का मूल कारण है। वहीं, मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि इससे पहले भी तीन मौकों पर पूजा और नमाज एक साथ शांतिपूर्ण ढंग से हो चुकी है।
जब हिंदू पक्ष ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की बात रखी, तो इस पर न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें भी मालूम है कि पूजा में इतना समय नहीं लगता।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
हाईकोर्ट को सुनवाई का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला के मूल विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच से दो सप्ताह के भीतर सुनवाई करने का अनुरोध किया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ASI की सीलबंद रिपोर्ट को ओपन कोर्ट में खोला जाए और उसकी प्रतिलिपि दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाए।
इसके बाद दोनों पक्षों को रिपोर्ट पर आपत्तियां दर्ज करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने अपनी ओर से याचिका का निपटारा कर दिया है और अब इस मामले की आगे की सुनवाई हाईकोर्ट करेगा। तब तक भोजशाला परिसर में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश रहेगा।
इस फैसले को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड पर हैं, ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो और दोनों समुदाय शांतिपूर्ण ढंग से अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान कर सकें।











