नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत, रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ही यह विधेयक अब औपचारिक रूप से कानून बन गया है। इसके साथ ही अब करीब दो दशकों से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह एक नया वैधानिक ढांचा लागू होगा, जिसे ‘विकसित भारत–जी राम जी’ नाम दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के अवसर बढ़ेंगे और पलायन पर भी अंकुश लगेगा।
क्यों जरूरी था नया कानून?
केंद्र सरकार के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में ग्रामीण भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। डिजिटलीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, बैंकिंग पहुंच और बुनियादी ढांचे में बड़े सुधार हुए हैं। ऐसे में सरकार ने पुराने ढांचे में मामूली संशोधन करने के बजाय एक नया और आधुनिक वैधानिक फ्रेमवर्क लाने का फैसला किया। सरकार का कहना है कि यह कानून ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य केवल अस्थायी मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि टिकाऊ और दीर्घकालिक ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है।
मजदूरों को मिलेगा बड़ा फायदा
नए अधिनियम के लागू होने से ग्रामीण मजदूरों को सीधा लाभ होगा। जहां पहले मनरेगा के तहत साल में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित था, वहीं अब 125 दिन का काम कानूनी रूप से मिलेगा। इससे मजदूर परिवारों की सालाना आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टैक में शामिल किया जाएगा। इससे गांवों में बनने वाली सड़कों, जल संरचनाओं, सामुदायिक परिसंपत्तियों और अन्य विकास कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।
इस कानून में किसानों के हितों को भी खास तौर पर शामिल किया गया है। राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे बुवाई और कटाई के मौसम को ध्यान में रखते हुए साल में 60 दिन तक कार्य रोकने की अवधि तय कर सकें। इससे खेती के पीक सीजन में खेतों के लिए मजदूरों की उपलब्धता बनी रहेगी। मजदूर खेती के समय खेतों में काम कर अतिरिक्त आय कमा सकेंगे और बाकी समय ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना के तहत रोजगार पा सकेंगे। इससे किसानों और मजदूरों दोनों की आय में संतुलन बनेगा।
ढांचागत कमियों को दूर करने का दावा
केंद्र सरकार के मुताबिक, ‘विकसित भारत–जी राम जी’ कानून के जरिए मनरेगा की कई पुरानी ढांचागत कमियों को दूर किया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर फ्रेमवर्क और बेहतर समन्वय से अब ग्रामीण विकास कार्य ज्यादा पारदर्शी, टिकाऊ और प्रभावी होंगे। सरकार का दावा है कि यह नया कानून न सिर्फ रोजगार उपलब्ध कराएगा, बल्कि गांवों में ऐसी परिसंपत्तियां तैयार करेगा जो आने वाले वर्षों तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी।












