कोप्पल: कर्नाटक के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल हम्पी में हुए बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में अदालत ने कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। गंगावती जिला सत्र न्यायालय ने सोमवार, 16 फरवरी 2026, को तीनों दोषियों को मौत की सजा सुनाते हुए इस जघन्य अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ की श्रेणी में रखा।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि मानवता, कानून और देश की प्रतिष्ठा पर किया गया सीधा हमला है।
इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई कर रहे सदानंद नागप्पा नायक ने दोषियों मल्लेश उर्फ हांडी मल्लेश, चैतन्य साई और शरणप्पा को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि महिलाओं के खिलाफ इस तरह की बर्बरता और विदेशी पर्यटकों के साथ क्रूर व्यवहार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
इस मामले की एक खास बात यह रही कि पूरी कानूनी प्रक्रिया मात्र 11 महीनों में पूरी कर ली गई। अदालत ने 6 फरवरी 2026 को ही तीनों आरोपियों को दोषी करार दे दिया था और सजा पर फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सार्वजनिक कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला?
यह रूह कंपा देने वाली घटना 6 मार्च 2025 की रात की है।
इज़राइल की एक महिला पर्यटक, अमेरिका का युवक डैनियल, महाराष्ट्र के ओनासिक निवासी पंकज और ओडिशा का रहने वाला बिबास कर्नाटक के विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल हम्पी घूमने आए थे।
सभी पर्यटक अंबिका नाइक द्वारा संचालित एक होमस्टे में ठहरे हुए थे।
घटना की रात सभी लोग तुंगभद्रा नहर के किनारे, रंगपुरा गंगम्मा मंदिर के पास एक छोटा सा संगीत कार्यक्रम कर रहे थे। उसी दौरान तीनों आरोपी वहां पहुंचे और पेट्रोल के बहाने 100 रुपये मांगने लगे। जब बिबास ने केवल 20 रुपये दिए, तो आरोपी भड़क गए और देखते ही देखते हिंसा पर उतर आए।
आरोपियों ने पंकज, डैनियल और बिबास के साथ मारपीट की और उन्हें उफनती नहर में धकेल दिया। इसके बाद वहां मौजूद इजराइली महिला पर्यटक और होमस्टे संचालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और उनका सामान लूट लिया गया।
नहर में गिरे युवकों में से पंकज और डैनियल किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए, लेकिन बिबास तेज बहाव में बह गया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि यह अपराध केवल महिलाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत आने वाले विदेशी मेहमानों की सुरक्षा और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी गंभीर आघात है।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए और इन्हें कठोरतम सजा देना ही न्याय है।














