
जमशेदपुर:
रेलवे बोर्ड की महत्वाकांक्षी बड़ामपहाड़–पुरी एक्सप्रेस पटरी पर दौड़ने के लिए तैयार है, लेकिन इसके रूट को लेकर स्थानीय राजनीति और जनभावनाओं का पारा चढ़ चुका है। ट्रेन के शुभारंभ का स्वागत तो हो रहा है, मगर हलुदपोखर को बाईपास किए जाने की आशंका ने इलाके में नई बहस छेड़ दी है। मामला अब सीधे दिल्ली स्थित रेल मंत्रालय के गलियारों तक पहुँच गया है, जहाँ से आई एक प्रतिक्रिया ने प्रशासनिक हलकों में सुगबुगाहट बढ़ा दी है।
टाटानगर की दौड़ से राहत या सिर्फ मायूसी?
ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के जिला सचिव कृतिवास मंडल ने सीधे रेल मंत्रालय को पत्र भेजकर मोर्चा खोल दिया है। मंडल का तर्क है कि अगर नई ट्रेन हलुदपोखर स्टेशन पर नहीं रुकी, तो इलाके के हजारों ग्रामीणों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह ट्रेन सिर्फ ‘दूर का ढोल’ बनकर रह जाएगी। वर्तमान में जगन्नाथ धाम पुरी, कटक के बड़े अस्पतालों या भुवनेश्वर के शिक्षण संस्थानों तक पहुँचने के लिए स्थानीय लोगों को 20 से 25 किलोमीटर दूर टाटानगर जंक्शन भागना पड़ता है। हलुदपोखर में मात्र 3 मिनट का ठहराव देकर न केवल यात्रियों का समय और पैसा बचाया जा सकता है, बल्कि टाटानगर स्टेशन पर लगने वाले अनावश्यक जाम और भीड़ के दबाव को भी घटाया जा सकता है।
सिर्फ 2 मिनट नहीं, ‘3 मिनट’ पर ही क्यों अड़े नेताजी?
आमतौर पर छोटे स्टेशनों पर ट्रेनों को 1 से 2 मिनट का हॉल्ट दिया जाता है, लेकिन आजसू नेता ने तकनीकी और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कम से कम 3 मिनट के ठहराव की शर्त रखी है। पत्र में दलील दी गई है कि पुरी यात्रा के दौरान बुजुर्ग, महिलाएं, मरीज और भारी सामान लेकर चलने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में होते हैं। कम समय मिलने पर आपाधापी और हादसों की गुंजाइश बनी रहती है। साथ ही, हलुदपोखर एक बड़ा व्यापारिक केंद्र होने के नाते रेलवे के खजाने में भारी टिकट राजस्व जोड़ने की पूरी क्षमता रखता है।
रेल मंत्रालय ने लिया संज्ञान, मुंबई तक पहुँची गूंज
इस मांग पत्र के सामने आते ही रेल मंत्रालय की ओर से प्रारंभिक सक्रियता देखने को मिली है। मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सेंट्रल रेलवे, मुंबई के सचिव लक्षण वी. जादव को पूरे प्रकरण की जांच और वस्तुस्थिति का प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार करने का जिम्मा सौंपा है।
अब सारा दारोमदार आने वाली तकनीकी जांच रिपोर्ट पर टिका है। देखना दिलचस्प होगा कि रेलवे प्रशासन जनहित, सुरक्षा और मुनाफे के इस गणित को हरी झंडी दिखाता है या हलुदपोखर की जनता को अपनी ही जमीन से गुजरती सुपरफास्ट ट्रेन को सिर्फ हाथ हिलाकर विदा करना पड़ेगा।


