
जमशेदपुर :क्या भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद में पर्दे के पीछे से कोई खामोश ‘डिजिटल सेंधमारी’ की जा रही है? यह सवाल अचानक तब गहरा गया है जब झारखंड की औद्योगिक नगरी जमशेदपुर के गोलमुरी थाने से उठी एक कानूनी चिंगारी ने सीधे नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन तक खलबली मचा दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आईटी विभाग की शीर्ष अधिकारी (DG IT) डॉ. सीमा खन्ना के खिलाफ जमशेदपुर के गोलमुरी थाने में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली शिकायत दर्ज कराई गई है। मामले में लगाए गए आरोप इतने संगीन हैं कि यदि वे साबित होते हैं, तो यह स्वतंत्र भारत के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा “डिजिटल चुनावी घोटाला” साबित हो सकता है।
सॉफ्टवेयर के जरिए ‘वोटर लिस्ट में खेल’? आरोप बेहद संगीन
शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि ECINet और ERONet जैसी अत्याधुनिक डिजिटल प्रणालियों की आड़ में चुनावी डेटा का अवैध रूप से केंद्रीकरण किया जा रहा है।
आरोपों की मानें तो:
अधिकारों का हरण: जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के वैधानिक और कानूनी अधिकारों को एक सुनियोजित तरीके से छीना गया है।
निजी कंपनियों का दखल: आईटी दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की कथित भूमिका पर उंगली उठाते हुए दावा किया गया है कि इसका अनुचित इस्तेमाल कर लाखों वैध और असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से चुपचाप ‘गायब’ कर दिए गए।
लोकतंत्र की निष्पक्षता पर वार: इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा और नागरिकों के मौलिक मताधिकार पर सीधा, सुनियोजित हमला बताया गया है।
“यह सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं, लोकतंत्र की रक्षा का मोर्चा है”
शिकायत दर्ज कराने के बाद संबंधित पक्ष ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ एक थाने की शिकायत तक सीमित नहीं रहने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, शिकायतकर्ता का कहना है:
“यह मतदाताओं के हक और लोकतंत्र की निष्पक्षता को बचाने की एक लंबी और निर्णायक लड़ाई है, जो किसी भी कीमत पर जारी रहेगी।”
जमशेदपुर पुलिस का त्वरित एक्शन, दिल्ली तक बढ़ीं धड़कनें
मामले की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखते हुए जमशेदपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाई है। पुलिस ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए प्राथमिक संज्ञान लिया है और आवश्यक जांच के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की इस त्वरित और कड़े रुख के लिए शिकायतकर्ता ने जमशेदपुर पुलिस और एसएसपी की कार्यशैली की सराहना की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि स्थानीय थाने से शुरू हुआ यह सियासी और कानूनी बवंडर चुनाव आयोग के शीर्ष गलियारों में क्या रंग दिखाता है।






