चेन्नई: चेन्नई में दशहरे के अवसर पर पारंपरिक रावण दहन के बजाय ‘रावणन लीला’ का आयोजन कर पुतले जलाने का अनोखा प्रदर्शन हुआ। पेरियारवादी संगठन थंथई पेरियार द्रविड़र कड़गम (TDPK) के लगभग 40 कार्यकर्ताओं ने मायलापुर स्थित संस्कृत कॉलेज के बाहर पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के पुतले जलाए।
संगठन के नेता एस. कुमरन ने इस विरोध का कारण बताया कि रामायण में द्रविड़ों को रावण जैसे राक्षस के रूप में चित्रित करना द्रविड़ पहचान का अपमान है। उनका आरोप है कि हर वर्ष दिल्ली और उत्तर भारत में रावण के पुतले जलाने से द्रविड़ संस्कृति का अपमान होता है, जिस पर उनकी प्रतिक्रिया के रूप में इस प्रकार का प्रदर्शन किया गया। कुमरन ने यह भी कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर रावण दहन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात था, फिर भी प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर अपनी कार्रवाई पूरी की।
पुलिस ने इस घटना के बाद 11 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिन्हें बाद में न्यायालय ने रिमांड पर भेजा। यह परंपरा पहली बार नहीं है; 1970 के दशक में भी पेरियार समर्थकों ने राम पुतला दहन का आयोजन किया था, जब 1974 में पेरियार की पत्नी मणियम्मै ने चेन्नई में भगवान राम का पुतला जलाया था। इस नए आयोजन ने रामायण, द्रविड़ राजनीति और सांस्कृतिक संघर्ष पर बहस फिर से जोर पकड़ने का मौका दिया है।













